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बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का जलवायु परिवर्तन सम्मेलन: सतत विकास और अनुकूलन की दिशा में कदम।

जलवायु संकट से समाधान की ओर: बिहार में न्यूनीकरण और अनुकूलन की नई पहल।

– सतत विकास का संकल्प: BSDMA का क्षेत्रीय सम्मेलन जलवायु चुनौतियों पर केंद्रित।

RKTV NEWS/पटना(बिहार )29 मई।बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA), पटना द्वारा आज सरदार पटेल भवन के ऑडिटोरियम में “जलवायु परिवर्तन, न्यूनीकरण एवं अनुकूलन” विषयक एक दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ माननीय उपाध्यक्ष डॉ उदयकान्त की अध्यक्षता में एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मण्डल गरिमामई उपस्थिती में सम्पन्न हुई। सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
पहले सत्र की अध्यक्षता पारस नाथ राय एवं सह-अध्यक्षता कौशल किशोर मिश्र (दोनों सदस्य, BSDMA) ने की। इस सत्र में नालंदा विश्वविद्यालय के सह आचार्य डॉ. सत्यनारायण शास्त्री, सिक्किम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार शर्मा, बिहार राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड वैज्ञानिक सलाहकार एस.एन. जयसवाल और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ले. जनरल (से.नि.) योगेन्द्र डिमरी ने क्रमशः जलवायु परिवर्तन, हिम झील विस्फोट, वायु प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु सहनशीलता जैसे विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता नरेंद्र कुमार सिंह एवं सह-अध्यक्षता प्रकाश कुमार (दोनों माननीय सदस्य, BSDMA) ने की, जिसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार से एस. चंद्रशेखर, ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन से मेघनाद बेहेरा एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कृष्ण एस. वत्स ने क्रमशः जलवायु न्यूनीकरण रणनीतियों, ओडिशा राज्य में की जा रही आपदा प्रबंधन के कार्यों एवं बाढ़ प्रतिरोधी गाँवों के मॉडल पर विचार रखे।
सम्मेलन का उद्घाटन एवं दीप प्रज्वलन आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मण्डल ने किया। सम्मेलन का परिचय प्राधिकरण के परियोजना पदाधिकारी डॉ. अजीत कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, आमंत्रित वक्तागण, प्राधिकरण परिवार, राज्य के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारीगण, पर्यावरणविद्, छात्र-छात्राएँ एवं जलवायु परिवर्तन से संबद्ध विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री विजय कुमार मण्डल ने जलवायु परिवर्तन को वैश्विक संकट बताते हुए इसके दुष्प्रभाव जैसे ग्लेशियरों का पिघलना, असमय वर्षा और फसल क्षति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बिहार के कई जिलों में असमय बारिश से मक्का जैसी फसलों को हुए नुकसान का उल्लेख किया। पेड़ों की कटाई, प्रदूषण और जंगलों की आग को उन्होंने जलवायु असंतुलन के मुख्य कारण बताया तथा स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण जागरूकता को समय की मांग बताया। मंत्री ने सामूहिक प्रयास और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए जनता से इस दिशा में सक्रिय सहयोग की अपील की।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NSDMA) के सदस्य कृष्ण एस वत्स ने अपने संबोधन में बिहार में बारहमासी बाढ़ समस्या की गंभीरता को रेखांकित किया और इसके सामाजिक, आर्थिक, पशुधन और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रबंधन की जिम्मेदारी अब अधिकतर आपदा प्रबंधन इकाइयों की है, और राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड का उपयोग गांव स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से किया जाना आवश्यक है। उन्होंने दो-स्तरीय रणनीति पर जोर दिया — पहला, बाढ़ जल के फैलाव के लिए पर्याप्त क्षेत्र सुनिश्चित करना ताकि जलस्तर कम हो सके; दूसरा, गांव स्तर पर छोटे-छोटे प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर विकसित करना जिससे गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने असम में चल रहे एक प्रायोगिक प्रोजेक्ट का उल्लेख किया और इसी तरह बिहार में भी 500 गांवों में एक पायलट प्रोजेक्ट लागू करने का प्रस्ताव रखा। यह समुदाय आधारित बाढ़ न्यूनीकरण मॉडल ₹25 लाख प्रति क्लस्टर की लागत से संचालित किया जाएगा। श्री वत्स ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना की सफलता में पंचायत, स्थानीय संस्था, समुदाय और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
BSDMA के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कान्त ने एनडीएम के इस प्रस्ताव को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इसे राज्य सरकार को भेज दिया गया है और इस दिशा में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने आशा जताई कि निकट भविष्य में इस पहल को धरातल पर उतारा जा सकेगा। माननीय उपाध्यक्ष ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में युवाओं, विद्यार्थियों और अधिकारियों को पर्यावरण के प्रति सजग और सक्रिय बनने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि आपदा प्रबंधन का कार्य केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक संकल्प भी है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने जिस सक्रियता से विभिन्न योजनाओं और नवाचारों को समर्थन दिया है, वैसा सहयोग उन्होंने अन्य राज्यों में नहीं देखा। उन्होंने चेताया कि जलवायु परिवर्तन अब नई पीढ़ी के लिए एक स्थायी यथार्थ बन चुका है। आज जन्म लेने वाले बच्चे उसी परिवेश में पले-बढ़ेंगे, इसलिए उन्हें यह बदलाव असामान्य नहीं लगेगा, परंतु हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस परिवर्तन को सकारात्मक दिशा दें। उन्होंने पितृ ऋण, ऋषि ऋण और देव ऋण को उतारने का संकल्प लेने एवं ईमानदारी से पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण, स्वच्छ जल एवं वायु की व्यवस्था करने का आवाहन किया। उन्होने BSDMA की नवीन तकनीकों, स्वदेशी वास्तुशिल्प और जलवायु अनुकूल भवनों की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि बिहार सरकार की सहयोगी भूमिका देशभर में अनुकरणीय है।
सदस्य पी. एन. राय ने जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर वैश्विक संकट बताते हुए इसे केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और विकास के लिए चुनौतीपूर्ण विषय कहा, और उदाहरणों सहित यह स्पष्ट किया कि भारत सहित बिहार में हीटवेव, असामान्य वर्षा और तापमान वृद्धि जैसी आपदाएँ इसी परिवर्तन की चेतावनी हैं; उन्होंने जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली को सशक्त करने, सरकारी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा समेकित रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए यह संदेश दिया कि इस चुनौती से निपटने के लिए सभी हितधारकों की संयुक्त भागीदारी अत्यावश्यक है।
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र ढिमरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के मद्देनज़र संस्थागत और सामुदायिक स्तर पर लचीलापन विकसित करना समय की मांग है। उन्होंने राज्यों से जलवायु कार्य योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने, विभागीय जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली सुदृढ़ करने का आग्रह किया। उन्होंने समुदायों विशेषकर किसानों, महिलाओं और मजदूरों को जागरूक एवं सक्षम बनाकर जलवायु-लचीली खेती और वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने पर बल दिया। साथ ही, तकनीकी संसाधनों, वित्तीय निवेश और विभागीय समन्वय की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने सभी हितधारकों से एकीकृत प्रयास की अपील की, ताकि जलवायु-प्रतिकारक समाज का निर्माण किया जा सके।
जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में राज्य की जलवायु नीति को CoP घोषणाओं के अनुरूप बनाकर सतत विकास की दिशा में अग्रसर होने का संकल्प लिया गया। साथ ही, बिहार की क्षेत्रीय जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनुकूलन रणनीतियों के निर्माण एवं क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाए जाने पर बल दिया गया। बाढ़ रोधी गांवों की संकल्पना को विस्तार देने तथा स्थानीय संवेदनशीलताओं के अनुरूप कार्ययोजनाएं तैयार करने एवं उनके क्रियान्वयन पर भी बल दिया गया। सम्मेलन में मंच संचालन संदीप कमल ने किया तथा औपचारिक समापन मोहम्मद मोइज़ उद्दीन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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