
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 अप्रैल। स्वतंत्रता आंदोलन का प्रथम शंखनाद करने वाले,बाबू कुंवर सिंह के वीरता का इतिहास भोजपुर के कण कण में बसा है। अस्सी बरस के भुजाओं में जो ताक़त थी उसकी गूंज लोक त्योहार,लोक परंपरा और प्राचीन इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है।
इसी वीर गाथा को भौतिक शास्त्री प्रो बलराम सिंह ने भोजपुरी गीत माला के माध्यम से युवाओं को समर्पित किया है। इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर दिनेश प्रसाद सिन्हा ने इनके भावनाओं को संकलित करने का प्रयास किया है। बताते चलें की प्रो सिंह स्थानीय महाराणा प्रताप नगर आरा के स्थाई निवासी,उम्र 79 वर्ष, शिक्षा एमएससी, पीएचडी,प्रथम योगदान 15.11.75 को ए एस कालेज विक्रमगंज में हुआ। 15.4.87 को जैन कालेज आये और 31.12.2013को अवकाश ग्रहण किये।एक प्रश्न के जबाब बताया की अध्यापन के अतिरिक्त ललित कला परिषद का अध्यक्ष, युवा महोत्सव का चेयरमैन तथा संस्कार भारती अध्यक्ष भी रहा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में 2006 से 08 तक कॉलेज इंस्पेक्टर भी रहा। साहित्यिक रचनाओं के संबंध में इन्होंने बताया कि कॉलेज में वरीय शिक्षकों की चर्चा जिसमें बीएचयू की तरह महाविद्यालय गीत की रचना की जिम्मेदारी मिली,जिसकी रचना की और सहर्ष जैन कॉलेज का गीत बना। दूसरी रचना कुलपति प्रो रामपाल सिंह के अनुरोध पर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय कुलगीत की रचना की जिसे कोई कार्यक्रम के पूर्व कुलगीत के रूप में गाया जाता है।प्रो सिंह ने बताया की यह कुलगीत राजभवन से अनुसंशित है। इसके बाद 1857 का बिगुल में भोजपुरी गीतों का एक सीडी जारी किया था जिसे विश्वविद्यालय और विशेष अवसरों पर सुनने को मिलता है।
नई पुस्तकसी संतावन के बिगुल” भोजपुरी गीत माला वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव के 2025 पर जारी हुआ है। पुस्तक के प्रथम खंड में 1857 का स्वतंत्रता आंदोलन का गीत तथा दूसरे खंड में आजादी के बाद का गीत है।
इस पुस्तक का लोकार्पण कुलपति प्रो शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी द्वारा 23 अप्रैल2025 को वीकेएसयू के नूतन परिसर जीरो माइल आरा में बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर सभागार में किया गया।वहीं आरा क्लब में पूर्ववर्ती छात्र संघ जैन कॉलेज आरा की ओर से आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि में पीयू के पूर्व कुलपति,महामंत्री
डा शशि कुमार सिंह द्वारा लोकार्पण हुआ। महाराजा कालेज आरा एवं महालेखाकार निदेशालय पटना के संयुक्त तत्वावधान में अभिलेख प्रदर्शनी तथा स्वतंत्रता आंदोलन के प्रथम महानायक बाबू कुंवर सिंह पर मुख्य अतिथि व पूर्व प्राचार्य प्रो गांधी जी राय का तथ्यपरक अभिभाषण हुआ तत्पश्चात डॉक्टर दिनेश प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में संतावन के बिगुल पुस्तक को अभिलेखागार से आए पदाधिकारीयों अतथियों द्वारा हस्तगत किया गया।बातचीत के क्रम में प्रो बलराम सिंह ने बताया कि इस पुस्तक को केवल भोजपुरी गीत की नजर से न देखा जाए। इसमें मंगल पांडे के इतिहास से लेकर कुंवर सिंह के विजय दिवस तक की पूरी ऐतिहासिक विवेचना है, जिसे पढ़ना ,जानना और पूर्वजों की कुर्बानियां को याद करना करने का संदेश है जो युवा पीढ़ी को समर्पित है।अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए उनके आदर्शों पर चलना होगा। मेरा एक ही उद्देश्य है कि इस पुस्तक को अधिक से अधिक लोग पढ़े।
