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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 3,880 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया।

RKTV NEWS/ नई दिल्ली 11 अप्रैल।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 3,880 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने काशी से अपने गहरे जुड़ाव की चर्चा करते हुए अपने परिवार और क्षेत्र के लोगों के आशीर्वाद के लिए उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया और उन्हें मिले अपार स्‍नेह और समर्थन को भी स्वीकार किया। प्रधानमंत्री ने इस स्‍नेह के प्रति ऋणी होने का भाव प्रकट करते हुए कहा कि काशी उनकी है और वे काशी के हैं। कल हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर होने पर श्री मोदी ने कहा कि काशी में संकट मोचन महाराज के दर्शन करने का अवसर पाकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि हनुमान जन्मोत्सव से पहले काशी के लोग विकास का उत्सव मनाने के लिए एकजुट हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बनारस के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि काशी ने आधुनिकता को अपनाते हुए न सिर्फ अपनी विरासत को संजोया है बल्कि उज्ज्वल भविष्य को भी अपनाया है। उन्होंने कहा कि काशी अब न केवल प्राचीन है बल्कि प्रगतिशील भी है, यह अब पूर्वांचल के आर्थिक मानचित्र का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि भगवान महादेव द्वारा निर्देशित काशी अब पूर्वांचल के विकास का रथ संचालित कर रही है।
कार्यक्रम में काशी और पूर्वांचल के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी कई परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास का उल्‍लेख करते हुए श्री मोदी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से सम्‍पर्क को मजबूत बनाने, हर घर में नल से जल पहुंचाने के अभियान और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं खेल सुविधाओं के विस्तार पर बल दिया। उन्होंने हर क्षेत्र, हर परिवार और हर युवा को बेहतर सुविधाएं देने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि ये पहल पूर्वांचल को एक विकसित क्षेत्र में बदलने में महत्‍वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से काशी के हर निवासी को बहुत लाभ मिलेगा और उन्होंने इन विकास प्रयासों के लिए बनारस और पूर्वांचल के लोगों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने आज महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर समाज के कल्याण और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उनके और सावित्रीबाई फुले के आजीवन समर्पण को याद किया। उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए उनके दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने के लिए जारी प्रयासों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलती है। उन्होंने पूर्वांचल के पशुपालक परिवारों, विशेषकर परिश्रमी महिलाओं को बधाई दी, जिन्होंने इस क्षेत्र के लिए एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि जब-जब महिलाओं पर भरोसा किया जाता है, तब-तब उन्‍होंने इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के बनास डेयरी प्लांट से जुड़े पशुपालक परिवारों को बोनस के वितरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक का यह बोनस कोई उपहार नहीं बल्कि उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का पुरस्कार है, जो उनके श्रम और दृढ़ता के मूल्य को दर्शाता है।
काशी में हजारों परिवारों के जीवन और नियति को नया आकार देने वाली बनास डेयरी के परिवर्तनकारी प्रभाव की चर्चा करते हुए, श्री मोदी ने बताया कि किस प्रकार से डेयरी ने कड़ी मेहनत को पुरस्कृत किया है और आकांक्षाओं को पंख दिए हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि इन प्रयासों ने पूर्वांचल की कई महिलाओं को “लखपति दीदी” बनने में सक्षम बनाया है और अब वे आजीविका की चिंताओं से समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रगति केवल बनारस और उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में स्पष्ट है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पिछले एक दशक में दूध उत्पादन में लगभग 65 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय लाखों किसानों और पशुपालकों को देते हुए कहा कि ऐसी उपलब्धियां पिछले दस वर्षों में निरंतर प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने डेयरी क्षेत्र को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के लिए की गई पहलों की ओर इशारा किया, जिसमें पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड सुविधाओं से जोड़ना, ऋण सीमा बढ़ाना और सब्सिडी कार्यक्रम का शुभारंभ शामिल है। प्रधानमंत्री ने पशुओं की सुरक्षा के लिए खुरपका-मुंहपका रोग के खिलाफ निशुल्‍क टीकाकरण कार्यक्रम का भी उल्लेख करने के साथ-साथ संगठित दूध संग्रह के लिए 20,000 से अधिक सहकारी समितियों को पुनर्कार्यान्वित करने के प्रयासों की भी चर्चा की, जिसमें लाखों नए सदस्य शामिल किए गए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत वैज्ञानिक प्रजनन के माध्यम से देशी मवेशियों की नस्लों को विकसित करने और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित करने को रेखांकित किया। इन पहलों का उद्देश्य पशुपालकों को नए विकास मार्गों, बेहतर बाजारों और अवसरों से जोड़ना है। प्रधानमंत्री ने पूर्वांचल में इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए काशी में बनास डेयरी परिसर की सराहना करते हुए कहा कि बनास डेयरी ने इस क्षेत्र में गिर गायों को वितरित किया है, जिनकी संख्या लगातार बढ़ रही है, और बनारस में पशु आहार की व्यवस्था शुरू कर दी है। उन्होंने पूर्वांचल के लगभग एक लाख किसानों से दूध एकत्र करने, उन्हें सशक्त बनाने और उनकी आजीविका को मजबूत करने के लिए डेयरी की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कई वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना कार्ड वितरित करने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके चेहरों पर दिख रहे संतोष के भाव बताते हैं कि यह इस योजना की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने अपने बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए परिवारों की चिंताओं को स्वीकार करते हुए 10-11 वर्ष पहले पूर्वांचल में चिकित्सा उपचार के संबंध में आने वाली कठिनाइयों को याद किया। क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी अब आरोग्‍य की राजधानी बन रही है। उन्होंने कहा कि उन्नत अस्पताल, जो कभी दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक सीमित थे, अब लोगों के घरों के पास ही उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सुविधाओं को लोगों के करीब लाना ही विकास का सार है।
पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा में की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर बल देते हुए उन्‍होंने कहा कि इससे न केवल अस्पतालों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि रोगियों का उपचार भी पूर्ण गरिमा के साथ किया जा रहा है। श्री मोदी ने आयुष्मान भारत योजना को गरीबों के लिए वरदान बताया, जो न केवल उपचार प्रदान करती है, बल्कि आत्मविश्वास भी जगाती है। उन्होंने कहा कि वाराणसी में हजारों और पूरे उत्तर प्रदेश में लाखों लोगों को इस योजना से लाभ हुआ है, और हर उपचार, ऑपरेशन और राहत उनके जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों के करोड़ों रुपये बचाए हैं, क्योंकि सरकार ने उनके स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी ली है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए निशुल्‍क इलाज के अपने वादे के साथ आयुष्मान वय वंदना योजना के शुभारंभ की चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल 70 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक के लिए निशुल्‍क उपचार सुनिश्चित करती है, चाहे उनकी आय कुछ भी हो। उन्होंने कहा कि वाराणसी ने सबसे अधिक वय वंदना कार्ड जारी किए हैं, यहां लगभग 50,000 कार्ड वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि सेवा के लिए प्रतिबद्धता है, जिससे परिवारों को जमीन बेचने, ऋण लेने या चिकित्सा उपचार के लिए असहाय होने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आयुष्मान कार्ड के साथ अब सरकार उनके स्वास्थ्य देखभाल की वित्तीय जिम्मेदारी उठाती है।
प्रधानमंत्री ने काशी के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में उल्लेखनीय परिवर्तन का उल्‍लेख किया, जिसकी आगंतुकों से व्यापक प्रशंसा हुई है। उन्होंने कहा कि लाखों लोग प्रतिदिन बनारस आते हैं, बाबा विश्वनाथ की पूजा करते हैं और पवित्र गंगा में स्नान करते हैं, कई लोगों ने शहर में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि अगर काशी की सड़कें, रेलवे और हवाई अड्डा एक दशक पहले की तरह ही बने रहते तो उसे कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले छोटे-छोटे त्योहारों के दौरान होने वाले ट्रैफिक जाम के साथ-साथ यात्रियों को धूल और गर्मी को झेलते हुए पूरे शहर से होकर गुजरना पड़ता था लेकिन अब फुलवरिया फ्लाईओवर के निर्माण और अन्‍य विकास कार्यों ने इन दूरियों को कम किया है, समय की बचत की है साथ ही दैनिक जीवन में सुलभता ला दी है। प्रधानमंत्री ने रिंग रोड के लाभों का उल्‍लेख किया, जिसने जौनपुर और गाजीपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के साथ-साथ बलिया, मऊ और गाजीपुर जिलों के लोगों के लिए हवाई अड्डे तक जाने के लिए यात्रा के समय को काफी कम कर दिया है। इसके निर्माण से घंटों तक यातायात में लगने वाली भीड़भाड़ खत्म हो गई है।
क्षेत्र में बेहतर यातायात सम्‍पर्क को रेखांकित करते हुए कहा कि इन चौड़ी सड़कों के साथ गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और आजमगढ़ जैसे शहरों में यात्रा तेज़ और सुविधाजनक हो गई है। श्री मोदी ने कहा कि कभी ट्रैफिक जाम से त्रस्त रहने वाले क्षेत्र अब विकास की गति देख रहे हैं। उन्होंने वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में सम्‍पर्क बढ़ाने के लिए पिछले एक दशक में हुए लगभग 45,000 करोड़ रुपये के निवेश का भी उल्‍लेख किया। उन्होंने कहा कि इस निवेश ने न केवल बुनियादी ढांचे को बल्कि विश्वास को भी बदल दिया है, जिससे काशी और पड़ोसी जिलों को लाभ हुआ है। उन्होंने हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखने सहित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे के वर्तमान में जारी विस्तार और कनेक्टिविटी में सुधार के लिए हवाई अड्डे के पास छह लेन की भूमिगत सुरंग के निर्माण पर भी चर्चा की। उन्होंने भदोही, गाजीपुर और जौनपुर को जोड़ने वाली परियोजनाओं की शुरुआत के साथ-साथ भिखारीपुर और मंडुआडीह में फ्लाईओवर के लंबे समय से प्रतीक्षित निर्माण का उल्लेख किया। उन्होंने इन मांगों के पूरा होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बनारस शहर और सारनाथ को जोड़ने वाले एक नए सेतु के निर्माण की भी घोषणा की, जिससे अन्य जिलों से सारनाथ जाने वाले यात्रियों को शहर से होकर गुजरने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले महीनों में, जब वर्तमान में परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, तो बनारस में आवागमन और भी सुविधाजनक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रगति से क्षेत्र में गति और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आजीविका और स्वास्थ्य सेवा के उद्देश्य से बनारस आने वाले लोगों के लिए बढ़ी हुई सुविधा पर भी बात की। उन्होंने काशी में सिटी रोपवे के ट्रायल की शुरुआत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बनारस ऐसी सुविधा प्रदान करने वाले दुनिया के चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा।
उन्‍होंने कहा कि बनारस में होने वाला हर विकास और बुनियादी ढांचा परियोजना पूर्वांचल के युवाओं को लाभ देता है। श्री मोदी ने काशी के युवाओं को खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए निरंतर अवसर प्रदान करने पर सरकार के विशेष दृष्टिकोण की भी बात की। उन्होंने बनारस में नए स्टेडियमों के निर्माण और युवा एथलीटों के लिए उत्कृष्ट सुविधाओं के विकास के साथ-साथ एक नए खेल परिसर के उद्घाटन का उल्लेख किया, जहां वाराणसी के सैकड़ों खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सांसद खेल प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को इन मैदानों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।
विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाने की भारत की यात्रा की चर्चा के साथ-साथ काशी को इस मॉडल का सबसे बेहतरीन उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री ने गंगा के प्रवाह और भारत की चेतना पर भी अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि काशी भारत की आत्मा और विविधता का सबसे सुंदर प्रतिनिधित्व है। उन्होंने काशी के हर मोहल्ले में अनूठी संस्कृति और हर गली में दिखाई देने वाले भारत के अलग-अलग रंगों का उल्लेख किया और काशी-तमिल संगमम जैसी पहलों पर प्रसन्‍नता जताई, जो एकता के सूत्र को मजबूत करती रहती हैं। उन्होंने काशी में आगामी एकता मॉल की घोषणा की, जो एक छत के नीचे भारत की विविधता को प्रदर्शित करेगा और देश भर के विभिन्न जिलों के उत्पाद प्रस्‍तुत करेगा।
प्रधानमंत्री ने हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में आए परिवर्तनों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि राज्य ने न केवल अपने आर्थिक परिदृश्य को बदला है, बल्कि अपने दृष्टिकोण को भी बदला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल संभावनाओं की भूमि नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षमता और उपलब्धियों की संकल्‍प भूमि बन गया है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर ‘मेड इन इंडिया’ की बढ़ती लोकप्रियता पर जोर दिया, जिसमें भारत में बने उत्पाद अब वैश्विक ब्रांड बन रहे हैं। उन्होंने भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग के साथ कई उत्पादों की मान्यता का उल्लेख करते हुए ये टैग भूमि की पहचान के प्रमाण पत्र हैं। उन्होंने कहा कि जीआई टैग यह दर्शाते हैं कि कोई उत्पाद उस मिट्टी से बना है और जहां भी जीआई टैग पहुंचता है, वे अधिक बाजार सफलता के मार्ग खोलते हैं।
देश भर में जीआई टैगिंग में उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने राज्य की कला, शिल्प और कौशल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मान्यता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वाराणसी और उसके आसपास के जिलों के 30 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिले हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह टैग वस्तुओं की पहचान का पासपोर्ट हैं। उन्होंने क्षेत्र के उन उत्पादों को सूचीबद्ध किया जिन्हें मान्यता दी गई है, जैसे वाराणसी का तबला, शहनाई, दीवार पेंटिंग, ठंडाई, भरवां लाल मिर्च, लाल पेड़ा और तिरंगा बर्फी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जौनपुर की इमरती, मथुरा की सांझी कला, बुंदेलखंड का कठिया गेहूं, पीलीभीत की बांसुरी, प्रयागराज की मूंज कला, बरेली की जरदोजी, चित्रकूट की काष्ठकला और लखीमपुर खीरी की थारू जरदोजी जैसे उत्पादों को हाल ही में जीआई टैग प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी की खुशबू अब सीमाओं को पार कर रही है और अपनी विरासत को दूर-दूर तक फैला रही है।
उन्‍होंने कहा कि काशी को संरक्षित करने का अर्थ भारत की आत्मा की रक्षा करना है। प्रधानमंत्री ने काशी को निरंतर सशक्त बनाने, इसे सुंदर बनाए रखने तथा इसकी प्राचीन भावना को आधुनिक पहचान के साथ जोड़ने की सामूहिक प्रतिबद्धता पर बल देते हुए अपने संबोधन का समापन किया।
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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