खैरागढ़/छत्तीसगढ़( रविंद्र पांडेय) 27 अप्रैल। याद रखो! इंसान को कभी अपना अंजाम नहीं भूलना चाहिए और कोई भी शख्स तब तक खुशकिस्मत नहीं कहा जा सकता जब तक वो अपनी खुशियों को कब्र तक साथ न ले जाय।
ग्रीक नाटककार सोफोक्लीज के 429 बीसी पूर्व रचित नाटक शहंशाह इडिपस का यह संदेश आनेवाले हजारों वर्षों तक अपने वजन को बरकरार रखेगा। इंसान रचता रहता है। रचता रहता है। अपने रचे पर इतराता भी है। विधाता का रचा सर्वोपरि होता है। पर जब एक रचनाकार रचता है, तो कलम उसके हाथ से नहीं, रोम-रोम से चलती है। कलम से स्याही नहीं, ऊर्जा निकलती है।
ऐसी ही ऊर्जा से ओतप्रोत नाटक शहंशाह इडिपस का एक ऊर्जावान टीम ने बीते 21 अप्रैल को मंचन किया। वाह। बहुत खूब। शुरुआत ने ही दर्शकों को मंच से बांध लिया।
शहंशाह इडिपस गंभीर प्रकृति का नाटक है। लंबा भी है। मगर निर्देशक डा. योगेंद्र चौबे ने अनुभवी हाथों से हर चरित्र को ढाला था। एक-एक दृश्य को सजाया था। कुछ अलग व बेहतर करने के उत्साह और उसके लिए की गई ईमानदार मेहनत का नतीजा रहा कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ का आडिटोरियम अंत तक खचाखच भरा रहा। विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग के रंगमंडल के कलाकारों की यह प्रस्तुति यकीनन यादगार रही।
मुख्य अतिथि कुलपति पद्मश्री ममता चंद्राकर ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा, यह अच्छी बात है कि हमारे कलाकार छत्तीसगढ़ी और हिंदी नाटकों के अलावा अंग्रेजी नाटक और खासकर गंभीर नाटक में भी प्रवीण हो रहे हैं।
कुलसचिव डा. आईडी तिवारी ने भी पूरी टीम को बधाई दी। यह नाटक उनके आग्रह पर ही तैयार किया गया था। उज्जैन से पधारे जाने माने रंगकर्मी शरद शर्मा जी की उपस्थिति भी अहम रही।
डा. योगेंद्र चौबे थिएटर विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। उनकी पहल पर ही यहां विश्वविद्यालय में सवा साल पूर्व रंगमंडल का गठन हुआ है। देश के कई शहरों में रंगमंडल की लगातार प्रस्तुतियां हो रही हैं और उनको पसंद भी किया जा रहा है।
धीरज सोनी और चैतन्य आठले – यहां गेस्ट लेक्चरर हैं। लेकिन रंगकर्म को लेकर इनका समर्पण किसी भी कालेज के स्थायी लेक्चर्स से कई गुना ज्यादा मेहनत करा लेता है।
इस नाटक के डिजाइन और सहायक निर्देशक धीरज सोनी और तकनीकी निर्देशक चैतन्य आठले रहे।
वस्त्र सज्जा – शिवानी अग्रवाल
संगीत – दिव्यांशु
पात्र परिचय –
इडिपस (सचिन कुमार), क्रियोन (रोहित कुमार), योकास्टा (श्रद्धा छेत्री), टायरेसियस (अतुल गोंडाना), राहब (हिमांशु कुमार), प्यांबर (मोहित सिंह), गड़रिया (भूपेंद्र पटेल), सैनिक (अयान रजा), कनीज (दीपिका देवदास), खादिम (तन्मय शर्मा), कोरस (आकाश शाक्या, डेविड सोलंकी, रूपेश साहू, रोहन जंघेल, विक्रम वर्मा और अमन मालेकर)।
