
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 3 अप्रैल। चैती छठ में छठव्रत्तियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया। हिंदी महीने के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठव्रत्तियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया। चैत्र शुक्ल चतुर्थी को छठव्रत्तियों ने शुद्धता से नहा धोकर अरवा चावल, चने का दाल और लौकी की सब्जी बनाकर खाया और अपने परिजनों को प्रसाद के रूप में खिलाया। चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि को दिनभर व्रत रहकर संध्या काल मे सूर्यास्त के समय छठ मइया का पूजा करके रोटी खीर चढ़ाया। कहीं-कहीं पूङी, खीर और केला भी चढाने का प्रचलन है। पूजा के बाद छठव्रतियों ने रोटी खीर का प्रसाद ग्रहण किया और उसके बाद अपने परिजनों, सगे- संबंधियों तथा परिचितों को प्रसाद खिलाया। निर्जला उपवास के बाद चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि को छठव्रत्तियों ने नदी, तालाब, पोखर तथा टब के पानी में खड़े होकर सूप में ठेकुआ और भिन्न-भिन्न प्रकार के फल लेकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। ऐसा माना है कि लोग उगते सूर्य की पूजा करते हैं। हिंदू धर्म में डूबते सूर्य और उगते सूर्य दोनों की पूजा एक समान की जाती है। छठ इस बात का जीता जागता प्रमाण है। अर्घ्य अर्पण के दौरान छठव्रतियों, उनके परिजनों द्वारा गाये गये तथा लाउडस्पीकर पर बज रहे छठ के मनभावन गीतों से माहौल भक्ति में हो गया। छठ पूजा मे देव कुमारी देवी, माया देवी, मीरा देवी, नीतू देवी, पुष्पा देवी, खुशबू देवी, रूपम देवी, अन्नू देवी, बिंदु देवी, अंशु देवी, ज्योति देवी आदि शामिल हैं।
