RKTV NEWS/अनिल सिंह,24 अप्रैल।रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ‘ हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रवाद अथवा राष्ट्रीयता को इनके काव्य की मूल-भूमि मानते हुए इन्हे ‘युग-चारण’ व ‘काल के चारण’ की संज्ञा दी गई है। आज उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है कवि अरुण दिव्यांश की रचना “दर्पण ज्योति” ।
“दर्पण ज्योति”
थी धरा पे जब ज्योति जगाने की ,
प्रभु ने रामरूप दूत तब पठाए थे।
राम का रूप धारण करने वाले ,
दिनकर रूपी प्रकाश दिखाए थे।।
किए संघर्ष वे तो आजीवन थे ,
समाज को दर्पण वे दिखाए थे ।
निसंकोच निर्भय प्रहार किए वे ,
नवशक्ति का संचार कराए थे ।।
कलम की धार थी पैनी उनकी ,
तलवारों की धारें भी फींकी थी ।
तुझे थे वे कुरीतियों से जमकर ,
उनकी कलम धरा पर टिकी थी ।।
कोटि नमन है उस राष्ट्रकवि को
सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
तन मन शक्ति दे मार्ग दिखा दे ,
मैं निज को समर्पित करता हूं ।।
