कथक एवं लोक शैली के एकात्मक नृत्य संयोजन की अद्भुत कला ने बनाया लोकप्रिय।
कलात्मक उपज से भिखारी ठाकुर की बिदेशिया को दिया नूतन रंग।
नृत्य क्षेत्र में नए दृष्टिकोण से सुदूर क्षेत्रों में कथक नृत्य को बनाया लोकप्रिय।
अपनी संस्था “शिवादी” के माध्यम से दे रही निःशुल्क नृत्य प्रशिक्षण।
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)08 मार्च।नृत्य रत्न, सुविख्यात महिला कलाकार अवार्ड, आम्रपाली सम्मान, राष्टृपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद सम्मान, स्त्री भूषण सम्मान, समेत नृत्य जगत में कई महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त नृत्यांगना व गुरु आदित्या कथक की जानीमानी कलाकार हैं। कथक एवं लोक शैली के एकात्मक नृत्य संयोजन की अद्भुत कला इन्हे काफी लोकप्रिय बना रही है। आदित्या द्वारा इस कलात्मक उपज ने भिखारी ठाकुर की बिदेशिया को एक नूतन रंग दिया है । नृत्य के क्षेत्र में एक नये दृष्टिकोण को लाकर सुदूर क्षेत्रों में कथक नृत्य को लोकप्रिय बनाने का कार्य कर रहीं हैं।
नृत्यांगना आदित्या का कर्म क्षेत्र बिहार में आरा और सिवान है किंतु कथक नृत्य के प्रदर्शन हेतु विदेशों का भी भ्रमण कर चुकी हैं। आदित्या ने कथक नृत्य की उच्च स्तरीय शिक्षा गुरु चांदनी शर्मा से प्राप्त कर बिहार के शिक्षा विभाग के विद्यालय में भी अध्यापन का कार्य कर रहीं है। इन्होंने नृत्य संरचना गंगा अवतरण, कृष्ण दीवानी मीरा, विदेशियां, ताल अष्टरूपक समेत की रचना एवं प्रदर्शन किया। विश्व रिकॉर्ड में दर्ज अंतर्राष्ट्रीय गंगा महाआरती की प्रमुख नृत्यांगना का सम्मान भी आदित्या को मिल चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में संगीत शिक्षा को सुलभ बनाने हेतु आप कई योजनाएं अपनी संस्था “शिवादी ” के माध्यम से चला रहीं हैं जिसमें गरीबी रेखा के लोग निशुल्क नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें हैं। देश के कई राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में निर्णायक हेतु भी आदित्या को आमंत्रित किया जाता है।
नृत्यांगना आदित्या का कहना है कि नृत्य करना मेरे संपूर्ण जीवन का अद्भुत क्षण है। नृत्य के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बताते हुए कहती हैं कि महिलाओ के लिए नृत्य का क्षेत्र संघर्षों से भरा रहता है। कई महिलाओ को आज भी पारिवारिक एवं सामाजिक विरोध को झेलना पड़ता है जबकि इस क्षेत्र में महिलाओं ने कई कीर्तिमान स्थापित किया है। कई महिला नृत्यांगणाओं ने नये दृष्टिकोण से समाज के लिए उदाहरण स्थापित किया है। नृत्य के क्षेत्र में सितारा देवी, मृणालानी साराभाई, रुकमणि देवी अरुंडेल, सोवना नारायण जैसे अग्रणी कलाकारों ने महिला प्रतिभाओं को प्रेरित किया है। समाज को कला क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।




