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एनएचएआई ने भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के “हरित आवरण सूचकांक” के विकास और रिपोर्ट के लिए एनआरएससी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

नई दिल्ली/04 जनवरी।भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के व्यापक नेटवर्क के “हरित आवरण सूचकांक” को विकसित करने और रिपोर्ट करने के लिए राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी) , जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के तहत कार्य करता है, के साथ तीन साल की अवधि के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं।
2015 में हरित राजमार्ग नीति की शुरुआत के बाद से, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) और एनएचएआई के लिए राजमार्ग गलियारों को हरित करने का कार्य प्राथमिकता के केंद्र बिंदु में रहा है। वर्तमान में, वृक्षारोपण की निगरानी क्षेत्रीय कर्मियों द्वारा स्थल के दौरे पर निर्भर करती है।
मूल स्थान पर डेटा संग्रह को बढ़ाने और वृक्षारोपण प्रबंधन व निगरानी को सहायता प्रदान करने के साथ-साथ एनएचएआई द्वारा किए गए प्रदर्शन ऑडिट समेत उभरती प्रौद्योगिकियों की क्षमताओं का उपयोग करते हुए, एनआरएससी राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए हरित आवरण का अखिल भारतीय आकलन करेगा, जिसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी का उपयोग किया जाएगा। इसका संदर्भ “हरित आवरण सूचकांक” के रूप में दिया जाता है। यह नवोन्मेषी दृष्टिकोण एक मजबूत और विश्वसनीय व्यवस्था का वादा करता है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली की गहनता का एक वृहद-स्तरीय अनुमान करने के क्रम में समय की बचत करने के साथ, लागत प्रभावी समाधान प्रदान करता है। यह उन क्षेत्रों में लक्षित कार्यक्रमों की सुविधा भी प्रदान करेगा, जहां पर्याप्त हरित आवरण की कमी है।
एनआरएससी, जिसका मुख्यालय हैदराबाद में है, को उपग्रह डेटा प्राप्त करने, डेटा उत्पादों के उत्पादन और अन्य चीजों के अलावा सुशासन के लिए भू-स्थानिक सेवाओं सहित सुदूर संवेदी अनुप्रयोगों के लिए तकनीकों के विकास के संदर्भ में भू-स्टेशन की स्थापना करने का अधिकार है। अवधारणा के प्रमाण के रूप में, एनआरएससी ने पहले ही राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरित आवरण के आकलन के लिए सफल पायलट परियोजनाएं संचालित की हैं।
परियोजना का व्यापक प्रयास पहले मूल्यांकन चक्र में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए क्षेत्र-वार हरित आवरण सूचकांक प्राप्त करना है। इसके बाद के वार्षिक चक्रों में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए हरित आवरण के विकास पैटर्न का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सूचकांक के निष्कर्षों से विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों की तुलना और रैंकिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे समय पर और आवधिक हस्तक्षेप किये जा सकेंगे। चूंकि राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रत्येक 1 किमी लंबाई के लिए हरित आवरण का अनुमान लगाया जाएगा, इसलिए व्यक्तिगत परियोजनाओं/पैकेजों के लिए भी विस्तृत माप रूपरेखा उत्पन्न करना संभव होगा। यह पहल, राजमार्गों के हरित परिवर्तन को बढ़ावा देने में एनएचएआई की महत्वपूर्ण भूमिका का मूल्यांकन करने की निष्ठावान प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो देश के समग्र पर्यावरण के कल्याण में योगदान देगी।

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