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पटना:भारत की दुर्दशा का अत्यंत मार्मिक गीत है ‘फिंरगिया : डॉ अनिल सुलभ

साहित्य सम्मेलन में प्राचार्य मनोरंजन, महाकवि वियोगी और रुद्र की मनायी गयी जयंती, दी काव्यांजलि।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)01 नवम्बर। अंग्रेज शासित भारत की दुर्दशा का अत्यंत मार्मिक चित्र है ‘फिरंगिया’। यह गीत पूर्वांचल के क्रांतिकारियों के कंठ में बसता था। इस एक गीत ने उसके रचनाकार प्राचार्य मनोरंजन प्रसाद सिन्हा को अमर कर दिया। मनोरंजन बाबू ने, बटोहिया’ के अमर गायक बाबू रघुवीर नारायण से इसकी प्रेरणा ली थी। उन्होंने बटोहिया की प्रथम पंक्ति के प्रथम पद ‘सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा’ से’ ही किंचित परिवर्तित कर अपने गीत का आरंभ किया था। फिरगियों की प्रथम पंक्ति थी “सुंदर सुधर भूमि भारत के रहे राम, आज इहे भइल मसान रे फिरगिया!”

यह बातें रविवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, आयोजित जयंती समारोह एवं कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। डा सुलभ ने कहा कि, मनोरंजन बाबू का यह गीत बिहार के गाँव-गाँव और गलियों में गाया जाता था। स्वतंत्रता के बाद भी दशकों तक इस गीत की अनुगूंज सुनायी देती थी। भारत क्या था और क्या बना दिया गया था, इसका ऐसा चित्रण किसी और गीत में नहीं मिलता।

डा सुलभ ने जयंती पर बिहार के अन्य दो कवियों महाकवि मोहन लाल महती ‘वियोगी और पं राम गोपाल शर्मा ‘रुद्र’ को भी थद्धा पूर्वक स्मरण किया तथा कहा कि मोक्ष-भूमि गया के ये दोनों काव्य-पुरुष, हिन्दी काव्य के महान तपस्वी थे। ‘वियोगी जी आधुनिक हिन्दी साहित्य के निमाताओं में से एक और बीसवीं शताब्दी के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों में अग्र-पत्तिय हैं। चंदों के मर्मस्पर्शी गीतकार रामगोपाल शर्मा ‘रुद्र’ मनुष्य के कोमलतम भावों और अंतह्नों के मर्मस्पर्शी चित्रकार थे।

समारोह का उद्घाटन करते हुए राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि मनोरंजन बाबू का फिरगिया गीत ने असहयोग आंदोलन में गहरा प्रभाव छोड़ा था। वियोगी जी और रुद्र जी जैसे कवियों ने हिन्दी का भंडार भरा।

मुख्यअतिथि और ऊर्दू लाइब्रेरी के अध्यक्ष अरशद फ़िरोज़ ने कहा कि मनोरंजन बाबू की फिरगियों जैसे गीत ही नहीं, उनके यात्रा वृतांत भी बहुत लोकप्रिय हुए। उनकी पुस्तक उत्तराखण्ड की यात्रा’ को भी बहुत मक्रबूलियत मिली। अपने बुजुर्गों को याद करना ज़रूरी है। इनसे हमें प्रेरणा मिलती है। ऐसे आयोजनों से हमें उनके बारे में जानने का भी मौका मिलता है।

सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा कुमार अरुणोदय, ओम् प्रकाश पाण्डेय ‘प्रकाश’, हा शालिनी पाण्डेय, डा नागेश्वर प्रसाद यादव तथा परवेज आलम ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन का आरंभ चंदा मिथ ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवि प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, शमा कौसर ‘शमा’, सुनील कुमार मलंग, इरफान अहमद बेलहारवी, पं गणेश झा, डा आर प्रवेश, सदानन्द प्रसाद, प्रतिभा पाराशर, इन्दु भूषण सहाय, रजनीश कुमार गौरव आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं से कवि-सम्मेलन को सार्थक किया। मंच का संचालन कवि सुनील कुमार दूबे ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रवीर कुमार पंकज ने किया।

बांके बिहारी साव, अधिवक्ता शिवानन्द गिरि, वरिष्ठ शिक्षिका निर्मला सिंह, राज आनन्द, मो प्रहीम, शंकर शरण मधुकर, अभिराम बुद्धवाहा समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।

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