
प्रयागराज/उत्तर प्रदेश (एजेंसी PR)29 अक्टूबर।उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के एक परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली 10 वर्षीय श्रेया की कहानी आज ग्रामीण शिक्षा और रेमेडियल लर्निंग की एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। बुनियादी समझ में कमजोरी के कारण कभी पढ़ाई से दूर होकर ड्रॉपआउट की कगार पर पहुँच चुकीं श्रेया आज न केवल नियमित रूप से स्कूल जा रही हैं, बल्कि अपनी क्लास के स्तर के अनुसार हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं।
पढ़ाई से हटा मन और स्कूल से दूरी
स्कूल में दाखिला होने के बावजूद बुनियादी समझ मजबूत न होने के कारण श्रेया अपनी कक्षा के अन्य बच्चों से काफी पीछे छूट गई थीं। विषय-गत कठिनाइयों के कारण उनका मन पढ़ाई से हट गया और उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति और जागरूकता की कमी के चलते श्रेया घर के काम-काज तक सीमित होने लगी थीं।
‘टीम बालिका’ का डोर-टू-डोर अभियान और पहल
वर्ष 2026 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ संस्था की ‘टीम बालिका’ ने घर-घर संपर्क अभियान के तहत श्रेया के पिता फूलचंद प्रजापति और माता शालू प्रजापति से मुलाकात की। टीम ने अभिभावकों को बालिका शिक्षा का महत्व समझाकर श्रेया को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रत्ना गुप्ता के सहयोग से स्कूल में खास रेमेडियल सेशन शुरू करने की रूपरेखा तैयार की गई।
‘ज्ञान का पिटारा’ (जीकेपी) से आया क्रांतिकारी बदलाव
कक्षा 3 से 5 तक के पिछड़ रहे बच्चों के लिए शुरू किए गए ‘ज्ञान का पिटारा’ (जीकेपी) कार्यक्रम के तहत एक्टिविटी कार्ड, अल्फाबेट कार्ड, नंबर कार्ड और खेल-कूद के जरिए बच्चों को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई कराई गई। किताबी बोझ से मुक्त इस खेल-खेल में सीखने के तरीके ने बच्चों के मन से पढ़ाई का डर खत्म कर दिया।
नियमित उपस्थिति और आत्मविश्वास
‘ज्ञान का पिटारा’ सेशन से श्रेया के शैक्षणिक जीवन में बड़ा सुधार हुआ। जो श्रेया पहले अक्षरों और संख्याओं में उलझती थीं, वे अब सहजता से पढ़ाई कर रही हैं। श्रेया ने उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि अब मुझे जीकेपी के सत्रों में पढ़ाई करना बहुत अच्छा लगता है और मैं हर दिन स्कूल आती हूँ।
अभिभावकों और स्कूल प्रशासन ने की सराहना
श्रेया के माता-पिता ने ‘ज्ञान का पिटारा’ किट को बच्ची का भविष्य संवारने का माध्यम बताया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रत्ना गुप्ता ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि एजुकेट गर्ल्स और टीम बालिका का सहयोग अत्यंत सराहनीय है। ‘ज्ञान का पिटारा’ के माध्यम से बच्चों के सीखने के स्तर में आया बदलाव समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
