
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 अगस्त।प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त संत तुलसीदास जी महाराज की जयंती प्रति वर्ष की भांति इस बार भी श्रद्धा भक्ति के साथ मनाई जा रही है।इसी क्रम में कलिपावनावतार कविचक्रचूड़ामणि श्री गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् तथा सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा फ्रेंड्स कॉलोनी कार्यालय में आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष आचार्य भारतभूषण पाण्डेय ने की। कार्यक्रम के आरंभ में भगवान श्रीसीताराम दरबार, पंचायतन और श्री हनुमानजी की पूजा-अर्चना की गई। तदुपरांत शास्त्रीय गायक राकेश कुमार मिश्र ने गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित “गाइये गणपति जगबंदन” और “जानकिनाथ सहाय करें तेरो” को प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर अध्यक्षीय वक्तव्य में आचार्य डॉ भारतभूषण पाण्डेय ने कहा कि आज बांग्लादेश में मंदिरों और हिन्दुओं पर जिस प्रकार का कहर ढाया जा रहा है उसी प्रकार के संकट से हमारा देश मुगल काल में गुजर रहा था।उस समय हमारे धर्म और हमारी संस्कृति को संजीवनी शक्ति देकर गोस्वामी तुलसीदास ने भारतीय मनीषा के विराट और उदार दर्शन से विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया तथा हमारे समस्त दर्शनों व धर्मग्रंथों का सारहृदय श्रीराम चरित मानस नामक कालजयी कृति के द्वारा प्रकट किया। आचार्य पाण्डेय ने कहा कि भक्तमालकार नाभा स्वामी जी महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज को आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का अवतार बताया है। श्रीराम चरित मानस तथा द्वादश ग्रंथावली विश्व को परस्पर प्रेम, सौहार्द, बंधुत्व तथा सह-अस्तित्व का ना केवल संदेश देते हैं बल्कि शिक्षण और प्रशिक्षण भी। रामराज्य सभी प्राणियों को सुखद तथा सबके लिए निर्वैर है। आचार्य ने कहा कि तुलसी साहित्य पुरुषार्थ, संघर्ष, भगवद्भक्ति और समाज को समर्पण के चार रास्तों के द्वारा मानव जीवन की सफलता का महत्त्व रेखांकित करते हैं। स्वागत भाषण रंग जी सिंह, संचालन मधेश्वर नाथ पाण्डेय तथा धन्यवाद-ज्ञापन सत्येन्द्र नारायण सिंह ने किया। इस अवसर पर शिवदास सिंह, ब्रह्मेश्वर दसौंधी, अशोक संहोत्रा, नर्मदेश्वर उपाध्याय, विश्वनाथ दूबे आदि प्रमुख लोगों ने गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज का कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया और उनके साहित्य को समाज का संबल बताया।
