राजीव रंजन प्रसाद ने सौंपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों को मंच उपलब्ध कराने पर रहेगा जोर।
पटना /बिहार (मनोज कुमार प्रसाद)07 अक्टूबर।वरिष्ठ पत्रकार एवं संस्कृतिकर्मी प्रेम कुमार को ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ का ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। कांफ्रेंस के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके मनोनयन पर पत्रकारिता, कला, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
प्रेम कुमार लंबे समय से पत्रकारिता के साथ-साथ कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उनके अनुभव और सक्रियता से संगठन की सांस्कृतिक गतिविधियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही, कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों और विभिन्न रचनात्मक विधाओं से जुड़ी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी नए प्रयास किए जाने की संभावना है।
अपने मनोनयन पर प्रेम कुमार ने ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने संगठन की प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन को भी विशेष धन्यवाद दिया। श्री कुमार ने कहा कि संगठन ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण दायित्व भी है। वह इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा, प्रतिबद्धता और ईमानदारी के साथ करेंगे।
उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति समाज को जोड़ने तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करने का सशक्त माध्यम हैं। लोककला, साहित्य, संगीत, रंगमंच और अन्य सांस्कृतिक विधाओं को बढ़ावा देने के साथ कलाकारों को उचित मंच उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। देश-विदेश में रहने वाले कायस्थ समाज की कला एवं सांस्कृतिक प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए भी विशेष पहल की जाएगी।
प्रेम कुमार ने कहा कि इस दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए संगठन के पदाधिकारियों, सदस्यों, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, पत्रकारों, कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों एवं शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में रचनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

