नव नालंदा महाविहार में हिंदी पखवाड़ा–2026 के समापन समारोह में हुआ प्रो. परिचय दास की दो पुस्तकों का लोकार्पण।
RKTV NEWS/नालंदा (बिहार)30 सितंबर।नव नालंदा महाविहार, नालंदा में हिंदी पखवाड़ा–2026 के समापन समारोह के अवसर पर हिंदी के वरिष्ठ कवि, सुगद्यकार और आलोचक प्रो. परिचय दास की दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। भाषा-विचारक एवं अनुवादविद् डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्र, लेखक-आलोचक प्रो. अवधेश प्रधान, महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह तथा हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. हरे कृष्ण तिवारी ने संयुक्त रूप से पुस्तकों का लोकार्पण किया। इस अवसर पर दोनों पुस्तकों के लेखक प्रो. परिचय दास भी उपस्थित थे।
लोकार्पित पुस्तकों में ‘एवम् अथवा’ (आदिकाल और मध्यकालीन कविता की रचनात्मक समालोचना) तथा ‘समीचीन’ (भारतीय साहित्य की सृजनात्मक आलोचना) शामिल हैं। दोनों कृतियाँ भारतीय साहित्य की परंपरा, रचनात्मकता और आलोचनात्मक दृष्टि के विविध पक्षों को केंद्र में रखती हैं।
‘एवम् अथवा’ में आदिकाल और मध्यकालीन कविता का रचनात्मक समालोचनात्मक विवेचन किया गया है। पुस्तक में इन काव्य-परंपराओं को केवल ऐतिहासिक संदर्भों में देखने के बजाय उनकी रचनात्मक ऊर्जा, संवेदना और अंतर्निहित अर्थ-संभावनाओं को समझने का प्रयास किया गया है। कविता के पुनर्पाठ के माध्यम से परंपरा के भीतर मौजूद अनेक स्तरों और अर्थों को सामने लाने की कोशिश पुस्तक की प्रमुख विशेषता है।
‘समीचीन’ भारतीय साहित्य की सृजनात्मक आलोचना के विभिन्न आयामों पर केंद्रित है। इसमें साहित्यिक कृतियों को आलोचना की एकरेखीय कसौटियों के बजाय उनकी रचनात्मकता, अनुभव-संसार और अंतर्वस्तु के संदर्भ में समझने की दृष्टि विकसित की गई है। पुस्तक साहित्यिक परंपरा के पुनर्पाठ के साथ आलोचना और रचना के परस्पर संबंधों को भी नए ढंग से देखने का प्रयास करती है।
दोनों पुस्तकों में साहित्य को केवल निष्कर्षों और स्थापित प्रतिमानों के माध्यम से देखने के बजाय उसके भीतर सक्रिय रचनात्मक अनुभवों और अर्थ-संभावनाओं तक पहुँचने की कोशिश दिखाई देती है। इस दृष्टि से ये कृतियाँ साहित्यिक आलोचना को अधिक संवेदनशील, रचनात्मक और संवादधर्मी बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रयास हैं।
लोकार्पण के अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने दोनों पुस्तकों को हिंदी आलोचना के क्षेत्र में रचनात्मक हस्तक्षेप के रूप में देखा। समारोह में नव नालंदा महाविहार के आचार्य, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा गैर-शैक्षणिक स्टाफ उपस्थित रहे।

