
नई दिल्ली/मनोज कुमार प्रसाद 18 सितंबर।भारतीय न्याय व्यवस्था में हुए बदलावों के साथ भारत की प्राचीन न्याय परंपरा को समझने के उद्देश्य से लिखी गई पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी तक पहुंची। दिल्ली स्थित बिहार निवास में पुस्तक के लेखक, अधिवक्ता एवं पत्रकार सुमित कुमार मिश्र ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर उन्हें पुस्तक की प्रति भेंट की।
पुस्तक देखने के बाद शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने लेखक से इसकी विषय-वस्तु और उद्देश्य को लेकर चर्चा की। बातचीत के दौरान भारतीय न्याय व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान कानूनी बदलावों तथा विद्यार्थियों के बीच संविधान और कानून की समझ विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ में केवल वर्तमान भारतीय कानून व्यवस्था का विश्लेषण ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और पौराणिक काल में न्याय व्यवस्था किस प्रकार संचालित होती थी, इसके विभिन्न संदर्भों पर भी चर्चा की गई है। पुस्तक भारतीय न्याय-दृष्टि की ऐतिहासिक यात्रा को आधुनिक न्याय व्यवस्था से जोड़कर देखने का प्रयास करती है।
लेखक सुमित कुमार मिश्र ने शिक्षा मंत्री के समक्ष बिहार की शिक्षा व्यवस्था में कानूनी जागरूकता को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को संविधान, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और कानून की बुनियादी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मिश्र के अनुसार, समाज में कानून को लेकर भय और भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए आवश्यक है कि बच्चों और युवाओं में शुरुआत से ही कानून के प्रति समझ, सम्मान और जिम्मेदारी का भाव विकसित हो।
उन्होंने कहा कि 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के बाद नई पीढ़ी को बदलती न्याय व्यवस्था से परिचित कराना और भी प्रासंगिक हो गया है।
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ इसी व्यापक उद्देश्य के साथ भारतीय न्याय परंपरा, संविधान और वर्तमान कानूनी व्यवस्था के बीच संबंध को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास है।
