RK TV News
खबरें
Breaking News

पटना:गाँधी कुछ दिन और जीवित रहते तो ‘हिन्दी’ भारत की ‘राष्ट्रभाषा’ होती।

महात्मा तो राष्ट्रपिता हैं ही, शास्त्री थे भारत के सच्चे ‘राष्ट्र-पुत्र’, जयंती पर सम्मेलन में हुई राष्ट्रभाषा-संगोष्ठी ।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)02 अक्टूबर। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी कुछ दिन और जीवित रहते, संविधान के निर्माण तक तो भारत को हिन्दी के लिए रोना नहीं पड़ता। ‘हिन्दी’ संविधान-सभा की प्रथम बैठक में ‘भारत की राष्ट्रभाषा’ घोषित हुई होती। वे हिन्दी को ‘देश की राष्ट्रभाषा’ मानकर समग्र भारत में इसका प्रचार कर रहे थे। उन्होंने अहिन्दी भाषी प्रदेशों में हिन्दी-प्रचार की अनेक संस्थाएँ स्थापित की थी। महाराष्ट्र के वर्धा में, जहां उनका आश्रम आज भी है, उन्होंने ‘राष्ट्रभाषा प्रचार समिति’ की स्थापना की थी, जो आज भी बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की भाँति चिरंजीवी और क्रियाशील है।

यह बातें शुक्रवार को साहित्य सम्मेलन में आयोजित महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर आयोजित राष्ट्रभाषा-संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि गांधी जी कहा करते थे कि भले ही अंग्रेज कुछ दिन और ठहर जाएं किंतु अंग्रेज़ी भारत से शीघ्र विदा हो! यह वे इसलिए कहा करते थे कि भारत की आत्मा को अपना पुराना स्वरूप ग्रहण करने में ‘अंग्रेज़ी’ही सबसे बड़ी बाधा है। यही भारत को एक नहीं होने दे रही। यह हिन्दी ही है, जो भारत को एक करेगी। भारत के एकत्व का सूत्र केवल और केवल हिन्दी में है।

जयंती पर भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भारत का अद्वितीय प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि यदि महात्मा गाँधी देश के राष्ट्रपिता हैं तो शास्त्री सच्चे अर्थों में भारत के ‘राष्ट्र-पुत्र’ हैं। दोनों ही महात्मा महान त्यागी और बलिदानी थे। ‘राष्ट्र और राष्ट्रभाषा’ के इन दोनों महान-सेवकों पर भारत को सदा ही गर्व रहेगा।

आरम्भ में अतिथियों का स्वागत और ‘राष्ट्र-भाषा-संगोष्ठी’ का विषय प्रवेश करते हुए, सम्मेलन के प्रधानमंत्री डा उपेंद्रनाथ पाण्डेय ने कहा कि गाँधी जी गुजराती थे, किंतु उन्होंने अपने सारे कार्य हिन्दी में किए। वे हिन्दी-आंदोलन के पुरोधाओं में थे। अखिल भारत वर्षीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अनेक वर्षों तक अध्यक्ष रहे। हिन्दी को राष्ट्रभाषा मानते हुए, उन्होंने इसका प्रचार किया। मैथली शरण गुप्त और प्रेमचंद समेत उस युग के सभी साहित्यकार गाँधी से प्रभावित थे। गाँधी जी हिन्दी के महान उन्नायकों में से एक थे। उन्होंने कहा था कि दक्षिण के जो लोग इसका विरोध करेंगे, वे वास्तव में देश का और स्वयं अपना भी अनिष्ट करेंगे। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा। जो आज सिद्ध हो रहा है।

चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से आरम्भ हुई इस संगोष्ठी में, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, डा ओम् प्रकाश पाण्डेय, शुभचंद्र सिन्हा, ईं अशोक कुमार, सिद्धेश्वर, डा आर प्रवेश, इन्दु भूषण सहाय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय तथा प्रवीर कुमार पंकज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

अश्विनी कुमार ‘कविराज’, डा चन्द्रशेखर आज़ाद, प्रेम अग्रवाल, अभिराम बुद्धवाहा, अरुण कुमार वर्मा, प्रेम प्रकाश, उमाकांत ओझा, केशव तिवारी आदि प्रबुद्धजन उपस्थित उपस्थित थे।

Related posts

रीपा में फ्लाई ऐश ब्रिक्स निर्माण कर 3.54 लाख रुपए की बिक्री कर चुकी है समूह की महिलाएं।

rktvnews

भोजपुर : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व चेहल्लुम के मद्देनजर शांति समिति की बैठक आयोजित।

rktvnews

जबलपुर में स्थापित होगा देश का सबसे बड़ा मल्टी फंक्शनल ट्रेनिंग सिम्युलेटर।

rktvnews

गढ़वा:पोषण माह 2026 के अंतर्गत गढ़वा ICDS में जिला स्तरीय फूड कॉम्पटीशन का आयोजन।

rktvnews

सारण:छपरा एवं सोनपुर आयोजना क्षेत्र के सुनियोजित विकास पर होगी सार्थक पहल – जिलाधिकारी

rktvnews

आगामी विधान सभा चुनाव में मुख्यमंत्री चिराग पासवान होगें-लोजपा रामविलास

rktvnews

Leave a Comment