
पटना/बिहार(राकेश मंगल सिन्हा) 6 अगस्त। महान शिक्षाविद, महाराजा काॅलेज आरा के पूर्व प्राध्यापक, बिहार के शिक्षा जगत के नक्षत्र, शिक्षकों के हितों के प्रहरी, नई आशा संस्था के उपाध्यक्ष और फुटाब (Federation of University Teacher’s Association of Bihar) के अध्यक्ष प्रो कन्हैया बहादुर सिन्हा का निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें कैंसर जैसी घातक बीमारी ने अपने आगोश मे ले लिया था।
उन्होंने बेंगलुरु मे कार्यरत अपने पुत्र के यहाॅ जाकर बेंगलुरु मे अपनी चिकित्सा कराई। बेंगलुरु से आकर वे पटना मे अपने बड़े भाई रेड क्रास के अध्यक्ष डॉ विनय बहादुर सिन्हा के यहाँ रहकर जयप्रभा मेदांता हॉस्पिटल मे अपनी चिकित्सा करा रहे थे। चिकित्सा के क्रम मे ही काल के क्रूर हाथों ने उन्हें अपने आगोश मे ले लिया। 4 अगस्त की देर रात्रि मे उनका स्वर्गवास हो गया।
पटना से उनका शव आरा स्थित उनके पैतृक आवास लाया गया। जहाँ बड़ी संख्या मे उनके शुभचिंतकों एवं लोगों ने उनका अंतिम दर्शन किया तथा श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका अंतिम संस्कार बक्सर मे किया गया। उनके निधन की खबर से उनके शुभचिंतकों, रिश्तेदारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर दौड़ गई। प्रोफेसर कन्हैया बहादुर सिन्हा ने अपना जीवन शिक्षा, शिक्षकों के हित एवं सम्मान और समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। विश्वविद्यालय के शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की रक्षा तथा विश्वविद्यालयों की गरिमा एवं स्वायत्तता के लिए वे आवाज उठाते रहे।
वे शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के आत्म सम्मान की आवाज थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी आरा मे रहकर उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सेवा के कार्यों मे सक्रियता से भाग लिया।
नई आशा संस्था के उपाध्यक्ष के रूप मे वे संस्था के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे। उनके निधन से हुई क्षति की पूर्ति को निकट भविष्य मे पूरा नही किया जा सकता है। वे समाज के लिए मार्गदर्शक की भूमिका मे रहे। उनका पैतृक गाँव भोजपुर जिले का धमार है।
