जयंती पर चित्तरंजन लाल भारती का हुआ एकल कथा-पाठ,हुई लघुकथा-गोष्ठी ।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )7 जुलाई। हिन्दी और संस्कृत के उद्भट विद्वान आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा पुरातन भारतीय ज्ञान के वैज्ञानिक-भाष्यकार थे। भारतीय दर्शन और वैदिक साहित्य का उन्हें गहरा अध्ययन था। भाषा-विज्ञान और साहित्यालोचन के यशस्वी विद्वान आचार्य शर्मा पटना विश्वविद्यालय और दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। काव्य-शास्त्र, अलंकार और साहित्यालोचन पर लिखी गई उनकी पुस्तकें आज भी विद्यार्थियों के लिए आदर्श ग्रंथ हैं।
यह बातें मंगलवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आचार्य शर्मा की जयंती पर आयोजित एकल-कथा-पाठ एवं लघुकथा-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि, आचार्य शर्मा उन अंगुली-गण्य महापुरुषों में से एक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, कला, संगीत जैसे मनुष्य के लिए सर्वाधिक मूल्यवान तत्त्वों के संरक्षण और विकास में खपा दिया। वे सच्चे अर्थों में ‘संस्कृति-पुरुष’ थे। साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में उनकी सेवाओं के लिए भी साहित्य-समाज ऋणी है।
डा सुलभ ने इस अवसर पर आयोजित ‘कथयामि कथा’ शीर्षक से सम्मेलन द्वारा चलायी जा रही ऋंखला में ‘एकल-कथा-पाठ’ के लिए आमंत्रित कथाकार चित्तरंजन लाल भारती को अंग-वस्त्रम पहनाकर अभिनन्दन किया।कथा-पाठ से पूर्व, सम्मेलन के अर्थमंत्री कुमार अनुपम ने कथाकार श्री भारती का जीवन-वृत्त पढ़कर सुनाया। श्री भारती ने ‘अच्छा कौन’, ‘आम जनता के लिए’, ‘पीछा करती दृष्टि’, ‘सृष्टि’, ‘ज़्यादा ज़रूरी’ तथा ‘हाँ,ठीक है’ शीर्षक से अपनी ६ लघुकथाएँ पढ़ीं, जिनपर, वरिष्ठ साहित्यकार डा रत्नेश्वर सिंह, विभारानी श्रीवास्तव और सागरिका राय ने अपनी त्वरित समीक्षा प्रस्तुत की।
लघुकथा-गोष्ठी में, विभारानी श्रीवास्तव ने ‘ धूँधली दृष्टि’ शीर्षक से, डा पुष्पा जमुआर ने ‘अहसास जी उठा’, सागरिका राय ने ‘लक्ष्मी’, ईं अशोक कुमार ने ‘बुढ़ापे का सहारा’ , शमा कौसर ‘शमा’ ने ‘मापदण्ड’, सूर्य प्रकाश उपाध्याय ने ‘थाती’, बी के बिहारी ने ‘अंतर की यात्रा’ तथा इन्दु भूषण सहाय ने ‘महल उदास’ भी अपनी-अपनी लघुकथा पढ़ी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी बच्चा ठाकुर, डा मनोज गोवर्धनपुरी, पं गणेश झा तथा चंदा मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया। आमंत्रित कथाकार श्री भारती की पत्नी कुमारी क्रांति, गोविन्द प्रसाद जायसवाल, नरेश कुमार, चन्द्रभूषण कुमार, प्रेम प्रकाश, अशोक कुमार, नीतीश कुमार, अमन वर्मा, नन्दन कुमार मीत, भास्कर त्रिपाठी आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

