
RKTV NEWS/आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)07 जुलाई।तमसा नगरी आजमगढ़ के गौरवशाली पूर्वांचल और पश्चिमांचल की सांस्कृतिक परंपरा में नाथ नगरी बरेली महोत्सव और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन का विचार बरेली के पूर्व पार्षद मनीषा सक्सेना के आवास पर आयोजित बैठक राष्ट्रीय महासचिव दीपक सक्सेना, वरिष्ठ विचारक विजेंद्र बाबू एवं अंतर्राष्ट्रीय संयोजक अरविंद चित्रांश के साथ सामूहिक रूप से किया गया। महोत्सव का उद्देश्य संस्कृति, आस्था और विकास का त्रिवेणी संगम होगा । आस्था, कला, अर्थव्यवस्था की वैश्विक पहचान पर केंद्रित रहेगा।
सम्मेलन के प्रभारी एवं बरेली के पूर्व पार्षद मनीषा सक्सेना ने कहा कि जिस तरह तमसा का तट पूर्वांचल का सांस्कृतिक गौरव है, उसी तरह नाथ नगरी बरेली भगवान शिव के 7 नाथ मंदिरों की नगरी अलखनाथ, मढ़ीनाथ, पातालेश्वर नाथ, बांकानाथ, धोपेश्वर नाथ, त्रिवटीनाथ, तपेश्वर नाथ। मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के दौरान इनकी स्थापना की थी। त्रेता युग से ये आस्था का केंद्र रही है। कला और अर्थव्यवस्था का सेतु- बरेली की जरी-जरदोजी, लकड़ी के खिलौने, मेंथा तेल मंडी, सुरमा नगरी की पहचान। “झुमका गिरा रे” जैसे गीत से विश्व प्रसिद्धि।लोकगीत, कव्वाली, नाटक और नाथ परंपरा के आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ेंगे और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में नाथ परंपरा और भारतीय संस्कृति,नाथ योग, नवनाथ परंपरा के विज्ञान और आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा करते हुए भोजपुरी, अवधी, ब्रज में नाथ साहित्य और नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, कनाडा, अमेरिका में बसी प्रवासी नाथ परंपरा को बरेली अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा मंच मिलेगा।
वन मंत्री उत्तर प्रदेश अरुण सक्सेना के परम सहयोगी,कायस्थ गौरव, बालाजी एजुकेशनल सोसाइटी के संस्थापक एवं चैंबर ऑफ़ टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ इंडिया के महासचिव दीपक सक्सेना जी ने कहा कि नाथ संप्रदाय और नाथ नगरी दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। एक है योग की परंपरा और दूसरा है आस्था की धरती। नाथ संप्रदाय के 9 सिद्धांत- योग, वैराग्य, काया साधना, गुरु भक्ति, समता, भ्रमण, आयुर्वेद और रसायन है। नवनाथ गुरु- गोरखनाथ, मछेन्द्रनाथ, जालन्धरनाथ, कानिफनाथ, भरथरीनाथ, रेवणनाथ, नागनाथ, चर्पटनाथ, गोपीचन्दनाथ है।
वरिष्ठ साहित्यिक विचारक बृजेंद्र बाबू ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय संयोजक एवं गौरवशाली पूर्वांचल के प्रधान संपादक और प्रभारी अरविंद चित्रांश जी की अपनी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है। जहां जाते हैं वहां संस्कृत सम्मेलन और साहित्य अकादमी की नींव रखते हैं। इसी कड़ी में आपने आगे कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नाथ साहित्य सम्मेलन बरेली से ही नाथ साहित्य अकादमी को वैश्विक पहचान मिलेगी। जिसमें अरविंद चित्रांश के सहयोग से काशी विद्वत परिषद, विश्वनाथ मंदिर के महंत, गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, हरिद्वार दशनाम संन्यासी अखाड़ा, परमार्थ निकेतन, उज्जैन महाकाल मंदिर, विक्रम विश्वविद्यालय, नेपाल पशुपतिनाथ, मॉरीशस सनातन धर्म मंदिर संघ, फिजी आर्य प्रतिनिधि सभा, सूरीनाम नाथ योग केंद्र, त्रिनिदाद भोजपुरी नाथ समाज, NRI नाथ फाउंडेशन, योग गुरु, भारत सरकार के संस्कृति/पर्यटन मंत्री, साहित्य अकादमी अध्यक्षगण आदि को सादर आमंत्रित किया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय महासचिव दीपक सक्सेना, पूर्व पार्षद मनीष,अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ विचारक, समाजसेवी बृजेंद्र बाबू , सारिका श्रीवास्तव, पूज्य ब्रह्माकुमारी माता कैलाशपति, माही और अंशिका दीपक और प्रशांत सिंह आदि उपस्थित रहे। और अंत में अंतर्राष्ट्रीय संयोजक अरविंद चित्रांश ने कहा कि नाथ नगरी बरेली में नाथ साहित्य अकादमी की स्थापना भारतीय संस्कृति, साहित्य, धर्म को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का ऐतिहासिक कदम होगा। आज तक योग, पतंजलि, भक्ति, कबीर तक सीमित रहे। नाथ परंपरा में योग, साहित्य, लोक, विज्ञान की त्रिवेणी को दुनिया तक पहुंचाना परम उद्देश्य है।नाथ नगरी बरेली महोत्सव लोगों को जड़ से जोड़ेगा और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन उसी जड़ को दुनिया तक पहुंचाएगा। योग की वाणी, लोक की भाषा को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा।
