
नई दिल्ली/प्रोफेसर बी. के. सिंह(रसायन विज्ञान विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय)06 जुलाई।दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक परम्परा, अकादमिक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक चेतना का एक सशक्त प्रतीक है। लगभग एक शताब्दी से यह संस्थान देश को ऐसे विद्वान, वैज्ञानिक, प्रशासक, न्यायविद, साहित्यकार और नीति-निर्माता प्रदान करता रहा है, जिन्होंने भारत के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे गौरवशाली विश्वविद्यालय का नेतृत्व जब एक दूरदर्शी, कर्मनिष्ठ, विनम्र और परिणामोन्मुख शिक्षाविद् के हाथों में हो, तो परिवर्तन केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे संस्थान की कार्य-संस्कृति में दिखाई देता है।
प्रोफेसर योगेश सिंह का दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त होना उनके प्रभावी नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता और विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। यह पुनर्नियुक्ति इस विश्वास की भी पुष्टि करती है कि उनके नेतृत्व में प्रारम्भ हुए शैक्षणिक और संस्थागत सुधार आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक, सुदृढ़ तथा प्रभावशाली रूप में आगे बढ़ेंगे। विश्वविद्यालय के इतिहास में लगातार दूसरा कार्यकाल प्राप्त करने वाले प्रथम कुलपति के रूप में उन्होंने एक नई परम्परा स्थापित की है।
वर्ष 2021 में कुलपति का दायित्व संभालने के बाद प्रोफेसर योगेश सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की भावना के अनुरूप दिल्ली विश्वविद्यालय को परिवर्तन, नवाचार और उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर किया। बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परम्परा, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल शिक्षा तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए अनेक दूरगामी पहलें की गईं। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण व्यवस्था तथा गुणवत्तापूर्ण अकादमिक वातावरण के निर्माण ने विश्वविद्यालय की नई पहचान गढ़ी है।
प्रोफेसर योगेश सिंह के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी संवादपरक कार्यशैली रही है। उन्होंने शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी, महाविद्यालयों और प्रशासन के बीच विश्वास, सहभागिता और समन्वय की ऐसी संस्कृति विकसित की, जिसने विश्वविद्यालय को अधिक उत्तरदायी, गतिशील और सकारात्मक बनाया। किसी भी बड़े संस्थान की सफलता केवल नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता से निर्धारित होती है—और यही उनके नेतृत्व की सबसे उल्लेखनीय पहचान है।
उनका स्पष्ट विश्वास रहा है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का केन्द्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और ज्ञान-आधारित भविष्य की आधारशिला है। इसी दृष्टि के साथ उन्होंने अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, उद्योग–अकादमिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता तथा विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास को विशेष प्राथमिकता दी। यही कारण है कि दिल्ली विश्वविद्यालय आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है।
उनकी प्रशासनिक शैली में दृढ़ता और संवेदनशीलता का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। सरलता, सहज उपलब्धता, त्वरित निर्णय क्षमता, पारदर्शिता और कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण ने उन्हें देश के सबसे सम्मानित शैक्षणिक प्रशासकों में विशिष्ट स्थान दिलाया है। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने केवल नई योजनाएँ ही नहीं बनाईं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर भी उतारा।
प्रोफेसर योगेश सिंह की पुनर्नियुक्ति वस्तुतः उत्कृष्ट नेतृत्व, पारदर्शी प्रशासन, संस्थागत निरंतरता और दूरदर्शी सोच की स्वीकृति है। यह सम्पूर्ण दिल्ली विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है कि विश्वविद्यालय को ऐसा नेतृत्व पुनः प्राप्त हुआ है, जिसने परिवर्तन की स्पष्ट दृष्टि के साथ उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प और सामर्थ्य दोनों प्रदर्शित किए हैं।
हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके दूसरे कार्यकाल में दिल्ली विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता, नवाचार, अनुसंधान तथा अकादमिक नेतृत्व के नए मानदंड स्थापित करेगा। साथ ही, विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में अपनी ऐतिहासिक भूमिका को और अधिक प्रभावी तथा सार्थक रूप से निभाएगा।
आदरणीय प्रोफेसर योगेश सिंह जी को उनके पुनर्नियुक्ति पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल, सफल और यशस्वी दूसरे कार्यकाल के लिए अनंत शुभकामनाएँ।
