स्टीयरिंग सह मॉनिटरिंग कमिटी की भी हुई समीक्षा, दिए गयें आवश्यक निदेश।

कार्यों में लापरवाही व ख़राब प्रदर्शन करने वालों को स्पष्टीकरण का निदेश।

विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं एवं गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर।

शैक्षणिक एवं सह शैक्षणिक गतिविधियों में गुणात्मक सुधार हेतु “Garhwa Learns, Garhwa Leads” की महता पर डाली गयी प्रकाश।

उपायुक्त ने कहा शिक्षा मानव मूल्यों के विकास हेतु सर्वोत्तम साधन, शिक्षा के क्षेत्र में जिला के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बैठक का आयोजन।
शिक्षा विभाग के समस्त टीम से सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने की अपील- उपायुक्त
RKTV NEWS/गढ़वा (झारखंड)01 जुलाई।आज उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग गढ़वा अंतर्गत संचालित सभी कार्यों एवं योजनाओं की जिला स्तरीय समीक्षात्मक बैठक का आयोजन स्थानीय टाउन हॉल गढ़वा में जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आहूत की गई। बैठक में उपायुक्त द्वारा एक-एक कर शिक्षा विभाग के विभिन्न बिंदुओं (इण्डिकेटर्स) पर गहन समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।
उन्होंने बैठक में उपस्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, बीईईओ एवं सभी बीपीओ/बीपीएम, MIS को-ऑर्डिनेटर्स तथा संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से बारी-बारी शिक्षा विभाग के अंतर्गत चल रही योजनाओं की जानकारी ली। कुछ योजनाओं में प्राप्त लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले पदाधिकारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई तथा कार्य में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। कार्य असंतोषजनक होने पर कार्रवाई करने की भी बात कही गई।
सभी संबंधित बीईईओ एवं बीपीओ/बीपीएम/बीआरपी/सीआरपी को नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने हेतु निर्देशित किया गया। इस हेतु जिला शिक्षा अधीक्षक एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया गया कि अपने अधीनस्थ सभी शिक्षा पदाधिकारी एवं कर्मियों का नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज संबंधी प्रतिवेदन का निरीक्षण करें एवं संबंधितों का मासिक परिलब्धि भी दर्ज उपस्थिति के अनुरूप ही करें। उपायुक्त ने सभी प्रखंडों के लिए निर्देश दिया कि मानक के अनुरूप स्टूडेंट अटेंडेंस होना चाहिए, स्टूडेंट अटेंडेंस में खराब प्रदर्शन करने वाले जिम्मेदार पदाधिकारी को स्पष्टीकरण करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान उपायुक्त द्वारा जिले की समग्र शैक्षणिक प्रगति, कंपोजिट जिला रैंकिंग, छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति, आधार एवं अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट, आधारभूत संरचना विकास, निपुण भारत मिशन, पीएम-श्री विद्यालयों का क्रियान्वयन, पलाश कार्यक्रम, पीएम-पोषण (मिड-डे मील) योजना, आईसीटी एवं स्मार्ट क्लास की स्थिति, स्वास्थ्य जांच एवं आयरन-फोलिक एसिड वितरण, सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) प्रशिक्षण, प्रोजेक्ट रेल के अंतर्गत मासिक मूल्यांकन, यू-डायस एवं एसएमएस रिपोर्टिंग, एनआईएलपी/उल्लास कार्यक्रम, न्यायालय से संबंधित लंबित मामलों एवं उनके अनुपालन, तथा समग्र शिक्षा के अंतर्गत लंबित अग्रिमों सहित अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं की क्रमवार समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि शिक्षा विभाग की सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति में सुधार, शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि तथा लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
पी०एम० पोषण (मध्याह्न भोजन) योजना अंतर्गत जिला स्तरीय स्टीयरिंग-सह-मॉनिटरिंग कमिटि हेतु बैठक में बिन्दुवार समीक्षा की गई, जिसमें विद्यालयों द्वारा एस०एम०एस० के माध्यम से मध्याहन भोजन संचालन की सूचना उपलब्ध कराने, पी०एम० पोषण (मध्याहन भोजन) योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रखण्डवार खाद्यान्न वितरण, पी०एम० पोषण (मध्याहन भोजन) योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 का माहवार ऑन लाईन डाटा एंट्री, प्रखण्ड स्तरीय स्टीयरिंग-सह-मॉनिटरिंग कमिटि की बैठक की समीक्षा एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 में किचेन-सह-स्टोर मरम्मति की अद्यतन स्थिति आदि की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिए गयें।
मध्यान भोजन में पोषक आहार एवं पूरक पोषण का वितरण मेनू के अनुसार ही सुनिश्चित किया जाय, का निदेश दिया गया। जिन योजनाओं में पुअर परफॉर्मेंस पाया गया उन्हें उपायुक्त द्वारा शीघ्र लक्ष्य प्राप्ति हेतु निर्देशित किया गया। इस दौरान उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों से आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए जिले की शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी बनाने की बात कही।
शिक्षा विभाग अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों के विभिन्न इंडिकेटर में अपेक्षाकृत खराब प्रदर्शन करने वाले बीपीओ/बीपीएम, MIS को-ऑर्डिनेटर को कड़ी चेतावनी देते हुए अगले मीटिंग तक संपूर्ण इंडिकेटर में बेहतर प्रदर्शन करते हुए लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि हासिल करने का निर्देश दिया गया।
विद्यालयों के निर्माण कार्य में आ रही समस्या अथवा राज्य स्तर से योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही समस्याओं के निदान हेतु उपायुक्त ने मौके पर उपस्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा अधीक्षक को उपायुक्त स्तर से पत्र भेजने हेतु निदेशित किया गया, ताकि कार्यों के निष्पादन में तेजी लाया जा सके।
इस दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा उपायुक्त श्री मिश्रा को झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 की महत्ता के बारे में बताया गया एवं बिना U-DISE Code के बच्चों का APAAR ID Generate नहीं होने की सूचना दी गई। आपार आईडी बच्चों का Digital Identification है जो बच्चों का Academic And extra co-curricular achievements का रिकॉर्ड रखता है।
बिना U-DISE Code वाले विद्यालय बच्चों का आपार आईडी के लिए सरकारी विद्यालय में भी नामांकन करवाकर बच्चों का आईडी Generate करवाते हैं एवं बच्चों को अपने स्कूल में पढ़ाते हैं। अर्थात दोबारा नामांकन कराते हैं। इससे जिले के इंडिकेटर्स का पूरा Status खराब हो रहा है एवं रैंकिंग नीचे हो जाता है। जो लाभ सरकारी स्कूल के बच्चों को मिलना चाहिए वो निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चें लेते हैं एवं इससे अच्छादन पर प्रभाव पड़ता है।
इस समस्या के निदान हेतु उपायुक्त श्री मिश्रा द्वारा वैसे बच्चें, जो सरकारी विद्यालयों में नामांकन कराके किसी निजी स्कूल में पढ़ाई करते हैं, के अभिभावकों को आपार आईडी की महता के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भी यदि बच्चें सरकारी विद्यालयों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते हैं तो वैसे बच्चों का सरकारी विद्यालयों से नाम काटने हेतु प्रस्ताव दें, ताकि इंडिकेटर्स का स्थिति खराब ना हो एवं रैंकिंग में सुधार लाया जा सके।
बैठक के दौरान झारखंड शिक्षा परियोजना गढ़वा की ओर से “Garhwa Learns, Garhwa Leads” के भारत में प्रकाश डाली गई, जिसमें बताया गया कि Garhwa Learns, Garhwa Leads” की शुरुआत शिक्षा प्रणालियों को नई सकारात्मकता के साथ कार्य करने के लिए किया गया है।
उपायुक्त श्री मिश्रा ने “Garhwa Learns, Garhwa Leads” के बारे में संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मानव मूल्यों के विकास हेतु सर्वोत्तम साधन है। आज का कार्यक्रम “Garhwa Learns, Garhwa Leads” की शुरुआत शिक्षा प्रणालियों को नई सकारात्मकता के साथ कार्य करने के लिए किया गया है। सकारात्मक ऊर्जा के साथ शिक्षण कर्मियों को कार्य करना होगा तभी वास्तविक विकास हो सकेगा। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक एवं सह शैक्षणिक गतिविधियों में गुणात्मक प्रगति लाने हेतु गढ़वा जिले में इस कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है जो शैक्षणिक एवं सह शैक्षणिक गतिविधियों को और भी प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने में सहायक होगी।
उन्होंने बताया कि बच्चों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की महती भूमिका होती है। शिक्षा बाकी सभी चीजों से एकदम अलग है। उन्होने कहा कि शिक्षकों एवं शिक्षण विभाग से सम्बद्ध कर्मियों/पदाधिकारी को नकारात्मकता को त्यागते हुए सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। “Garhwa Learns, Garhwa Leads” Under District Education Innovation Challenges एवं District Education Performance Review के Indicatotor में गढ़वा जिला के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस कार्ययोजना को तैयार किया गया है, जो शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावी रूप से कार्य करेगा। इसके तहत जिला स्तर पर एक कार्यदल का भी गठन किया गया है। उन्होंने उपस्थित शिक्षा विभाग के संपूर्ण टीम को सकारात्मक सोच के साथ शिक्षक कार्यों में सहयोग करने की अपील की।
इसके पूर्व झारखंड शिक्षा परियोजना के पदाधिकारियों द्वारा उक्त कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा एवं उनके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्होंने बताया कि उपायुक्त के आदेश के आलोक में DEIC (District Educa Enovation Challenge) एवं District Education Performance Review Indicatotor में गढ़वा जिला के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार इस कार्ययोजना को हम सभी GARHWA LEARNS-GARHWA LEADS के नाम से जानते हैं।
इस कार्य योजना को धरातल पर उतारने एवं शैक्षणिक और सह शैक्षणिक गतिविधियों में गुणात्मक प्रगति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का जिला स्तर पर निर्माण किया गया है, जिसमें कुल गतिविधियों पर फोकस किया गया है। इसके अंतर्गत मिशन रेड अलर्ट, गढ़वा स्पीक्स, स्मार्ट क्लास फॉर ए स्मार्टर माइंड, परख, पीएम पोषण, ग्रीन स्कूल क्लीन स्कूल, इग्नाइट इनोवेशन, डेस्टिनेशन एवं फ्रॉम एजुकेशन टू प्रोस्पेरिटी आदि शामिल है।
उपरोक्त गतिविधियों के द्वारा उक्त कार्य योजना के उद्देश्यों को पूर्ण किया जाएगा। इसके माध्यम से पोषक क्षेत्र के विद्यालय, शिक्षक, छात्र एवं समाज की सहायता से प्रत्येक बच्चे का नामांकन सुरक्षित करना, उपस्थित बढ़ाना एवं बच्चों के छीजन को रोकना है। इस कार्यकम को प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिकक विद्यालयो के बच्चो में अभिव्यक्ति की क्षमता के विकास हेतु तैयार किया गया है।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में बोलने का आत्मविश्वास बढ़ाना एवं झिझक खत्म करना, उनमे मंच पर बोलने की क्षमता का विकास करना है ताकि बच्चे खुलकर अपनी बातो को रख सके।
पीएम पोषण का सफल क्रियान्वयन, वार्षिक खेलकूद, पाठ्य सहगामी कार्यक्रम तथा विज्ञान, सामाजिक विज्ञान एवं नवाचार के लिए प्रयोगशालाओं का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसमें उक्त गतिविधियों के साथ जिला स्तर से विद्यालय मूल्यांकन किया जाएगा एवं प्रत्येक प्रभाग में टॉप करने वाले विद्यालयों को जिला स्तर पर सम्मानित करने का कार्य किया जाएगा।
उक्त बैठक में उपरोक्त पदाधिकारियों के अतिरिक्त उप विकास आयुक्त प्रेमलता मुर्मू, जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज, सभी बीईईओ, बीपीओ/बीपीएम बीआरपी/सीआरपी, MIS को-ऑर्डिनेटर्स विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षा विभाग के एई/जेई, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के प्रधान सहायक समेत अन्य संबंधित उपस्थित थें।

