
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 26 मई। आज कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर पटना के संयुक्त तत्वावधान में कोइलवर प्रखंड के बहियारा गाँव में “संतुलित उर्वरक उपयोग” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करना, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा कृषि उत्पादन में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना था। इस अवसर पर पटना से डॉ. कमल शर्मा, सौरभ कुमार एवं अमरेंद्र कुमार तथा कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर से डॉ. सच्चिदानंद सिंह उपस्थित रहे।
डॉ. कमल शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति को लगातार कम कर रहा है। उन्होंने बताया कि केवल नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग फसल उत्पादन को असंतुलित बनाता है तथा मिट्टी में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी उत्पन्न करता है। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी।
सौरभ कुमार ने किसानों को बताया कि खेतों में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है तथा रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय जैविक खाद बनाने में करने की सलाह दी।अमरेंद्र कुमार ने किसानों को ड्रिप सिंचाई एवं फर्टिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी, जिससे उर्वरकों की बचत के साथ-साथ उनकी उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सकती है।डॉ.सच्चिदानंद सिंह ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य किसी भी कृषि प्रणाली की आधारशिला है। उन्होंने प्रत्येक किसान को समय-समय पर अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए।मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से खेत की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है तथा फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
