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सन नियो की अभिनेत्रियां मेघा रे और गौरी शेलगांवकर ने साझा की अपनी नवरात्रि से जुड़ी यादें।

मुंबई/महाराष्ट्र (एजेंसी पीआर 24× 7)25 सितंबर। नवरात्रि के मौके पर मातारानी के आगमन से ही पूरा माहौल रंगबिरंगा और सकारात्मक हो जाता है। इसी प्रकार कलाकारों की भी इस मौके से जुड़ी खूबसूरत यादें ताज़ा हो जाती हैं। दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी में दिव्या का किरदार निभा रहीं मेघा रे और प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी में घेवर के रूप में नज़र आ रहीं गौरी शेलगांवकर, दोनों ने अपनी नवरात्रि से जुड़ी यादों को साझा किया।
दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शो में दिव्या की मुख्य भूमिका निभा रही अभिनेत्री मेघा रे ने कहा,”दुर्गा पूजा हमेशा से मेरे लिए बहुत खास रही है। बचपन में मेरा परिवार और मैं पंडालों में जाया करते थे और वहाँ मिलने वाले स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते थे। बड़ी-बड़ी दुर्गा माँ की प्रतिमा देखना हमेशा अद्भुत अनुभव होता था। आज भी जब मौका मिलता है तो मैं कम से कम एक दिन अपनी माँ के साथ दुर्गा पंडाल ज़रूर जाती हूँ। नवरात्रि का व्रत रखना हमारे यहाँ ज़्यादा आम नहीं है, लेकिन मेरी माँ जहाँ-जहाँ वो रहीं, वहाँ की परंपराओं को उन्होंने अपनाया है। वे कई सालों से नवरात्रि का व्रत रखती आ रही हैं। उन्हें अकेले ऐसा करते देखकर मैंने भी उनके साथ व्रत रखना शुरू किया। पहली बार उनके साथ इस व्रत की शुरुआत करना मेरे लिए बहुत ख़ास है। इस साल दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शो में शूटिंग में व्यस्त होने के कारण मैं व्रत तो नहीं रख पाऊँगी, लेकिन दुर्गा पूजा के उत्सव को ज़रूर मनाऊँगी और माँ के साथ समय बिताऊँगी।”
प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी शो में घेवर की भूमिका निभा रही अभिनेत्री गौरी शेलगांवकर ने अपनी यादें साझा करते हुए कहा, “नवरात्रि मेरे दिल के बहुत करीब है, क्योंकि मेरे होमटाउन नागपुर में हमारे घर पर हमेशा देवी की कलश स्थापना की जाती है और उसकी तैयारियों में हिस्सा लेना बड़ा आनंददायक होता है। हर दिन आरती, पूजा करना और गरबा खेलना बहुत अच्छा लगता था। मुझे याद है, मैं और मेरे दोस्त शाम 7–8 बजे से तैयार होकर देर रात तक गरबा खेलते थे। माँ के साथ अलग-अलग पंडालों में जाकर देवी माँ के दर्शन करना और उनकी खूबसूरत प्रतिमाओं को देखना मेरे लिए खास अनुभव था। एक कलाकार होने के नाते मैं अक्सर खुद को पौराणिक किरदारों में इमेजिन करती हूँ और अगर मौका मिला, तो मैं माँ पार्वती की भूमिका जरूर निभाना चाहूँगी। भगवान महादेव की भक्त होने के नाते मैं हमेशा उनकी गरिमा, सुंदरता और शक्ति की प्रशंसा करना चाहती हूँ। उन्हें पर्दे पर जीवंत करना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा होगा।”
दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी दिव्या की रहस्यमयी यात्रा को दर्शाता है, जिसमें प्रेम से मिलने के बाद उसका जीवन प्यार, राज़ और अप्रत्याशित मोड़ों से भर जाता है। वहीं प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी घेवर की कहानी है, जो राजस्थान के एक छोटे से गाँव की चंचल और स्वतंत्र स्वभाव की लड़की है। उसकी साधारण ज़िंदगी में अचानक एक नया मोड़ तब आता है, जब एक नवजात शिशु उसकी दुनिया का हिस्सा बन जाता है।

देखना न भूलें दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी रात 8:30 बजे, प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी, रात 9:00 बजे, सिर्फ सन नियो पर।

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