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किसान विरोधी राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति का प्रारूप वापस लो: सुदामा प्रसाद

RKTV NEWS/आरा(भोजपुर)12 मार्च।आज लोकसभा के शून्यकाल में आरा सांसद सुदामा प्रसाद ने राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक किसान एकता और आंदोलन के सामने हार का सामना करने के बाद, मोदी सरकार अब राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति के मसौदे के नाम पर अस्वीकृत तीन कृषि कानूनों को पिछले दरवाजे से लाने की कोशिश कर रही है।
वह किसान आंदोलन जिसने तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाया, वह भी मोदी सरकार को नहीं रोक सका, जो अब पिछले दरवाजे से उन्हीं रद्द किए गए कानूनों को फिर से लागू करने पर आमादा है। राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति का प्रारूप “राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति रूपरेखा” एक और चाल है जिसके माध्यम से रद्द किए गए कृषि कानूनों को दोबारा थोपने का प्रयास किया जा रहा है। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है — किसानों को क्या चाहिए, इसका फैसला करने का अधिकार किसे है? यदि नीति ही समाधान है, तो किसानों के संगठनों से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए था, उनके सुझावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए था, और इस राष्ट्रीय नीति के मसौदे को तैयार करने में उनकी भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए थी।
राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति का मसौदा सुधारों का रोडमैप होने का दावा करता है, फिर भी यह गुप्त रूप से 2020 के रद्द किए गए कृषि कानूनों को फिर से लागू करने की कोशिश करता है। यह नीति एपीएमसी (APMC) को कमजोर करती है, राज्य के अधिकारों को सीमित करती है और कॉरपोरेट के वर्चस्व को बढ़ाती है, जिससे पुराने कानूनों को नए रूप में फिर से लाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह अत्यंत आवश्यक है कि मोदी सरकार इस नीति को तुरंत वापस ले और यह सुनिश्चित करे कि खेती लाभकारी बनी रहे तथा उत्पादन का स्वामित्व किसानों और उनकी सामूहिक शक्ति के हाथों में ही रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा शुरू किया गया टैरिफ युद्ध हमारे किसानों के लिए हानिकारक साबित होगा। एक विकासशील देश के रूप में भारतीय कृषि को जो लाभ मिल रहे थे, वे अब अमेरिकी उत्पादों के सामने समाप्त हो जाएंगे, क्योंकि अमेरिका का कृषि क्षेत्र कहीं अधिक विकसित है। दुखद है कि भारतीय सरकार, भारतीय किसानों और कृषि की रक्षा करने के बजाय, भारतीय कृषि को अमेरिकी कॉरपोरेट्स की साम्राज्यवादी साजिश के हाथों बेचने पर अड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति को तुरंत वापस ले तथा नीति बनाने के लिए किसान संगठनों की भागीदारी तथा सलाह लेकर सुझाव को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाए।
उक्त जानकारी सांसद के निजी सहायक चन्दन कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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