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भोजपुर:प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक, 2025 कानूनी पेशे और अधिवक्ताओं के अधिकारों पर बड़ा हमला : आइलाज

बिना शर्त वापसी की मांग पर देशव्यापी आंदोलन।

RKTV NEWS/आरा(भोजपुर)20 फरवरी। ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (आइलाज) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बिहार राज्य संयोजक एडवोकेट मंजू शर्मा (पटना हाईकोर्ट) और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अमित कुमार बंटी ने एक संयुक्त बयान जारी कर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2025 के खिलाफ एकजुट होकर इसका विरोध करने की अपील की है।
आइलाज नेताओं ने बताया कि अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 को बिना शर्त वापस लेने, कानूनी पेशे में केंद्र सरकार के अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिलों की स्वायत्तता को सुरक्षित रखने, अधिवक्ताओं की कानूनी प्रैक्टिस और विरोध के मौलिक अधिकार की रक्षा करने, कानूनी समुदाय में आर्थिक व सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने तथा विदेशी विधि फर्मों व वकीलों के असीमित प्रवेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर आइलाज देश भर में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक, 2025 के जरिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में कई ऐसे संशोधन प्रस्तावित किये हैं जो बेहद चिंताजनक हैं। ये संशोधन कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरे में डालते हैं और सरकार को बार काउंसिल, अधिवक्ताओं और अधिवक्ता संघों को नियंत्रित करने का अधिकार प्रदान करते हैं।
नेताद्वय ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में केंद्र सरकार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया में तीन सदस्यों को नामित करने और उसको निर्देश जानी करने के अधिकार देने के प्रस्ताव हैं। साथ ही सरकार को विदेशी फर्मों व विदेशी वकों के प्रवेश के लिए भी रास्ता बनाने का अधिकार मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि बार संघ में अनिवार्य पंजीकरण, अदालत के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों पर कानूनी प्रतिबंध, अधिवक्ताओं को किसी भी समय बार परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जाना और अस्पष्ट रूप से परिभाषित ‘दुराचार’ के लिए कठोर दंड, यहां तक कि प्रैक्टिस करने से हटाया जाना और मुवक्किल को हुए नुकसान के लिए अधिवक्ताओं पर नई देनदारियां थोप देने के प्रस्ताव अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर खुला हमला है।
दोनों ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन राज्य बार काउंसिलों की शक्तियों का भी क्षरण करता है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया बीसीआई) को राज्य बार काउंसिलोंपर सर्वोच्च अधिकार देने और उनको भंग करने और उनका नियंत्रण अपने हाथ में लेने, किसी भी अधिवक्ता को पूरे देश में निलंबित कर सकने और नामांकन शुल्क और स्थानांतरण शुल्क तय करने जैसे असीमित अधिकार देता है। इसमें बार काउंसिलों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और हाशिये पर मौजूद समूहों के लिए आरक्षण का भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

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