
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 फ़रवरी। शनिवार को प्रसिद्ध मनीषी संत श्रीजीयर स्वामी जी महाराज की प्रेरणा तथा ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेंद्र पूर्व कुलपति के संयोजक तत्व में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के अवसर पर गौरी शंकर विवाह महोत्सव का शुभारंभ हो गया। प्रातः काल श्रीमद् भागवत का परायण हुआ तथा 3:00 बजे से श्रीमद् भागवत प्रवचन प्रारंभ हुआ। प्रवचन का शुभारंभ करते हुए श्री त्रिदंडी स्वामी सेवा आश्रम ब्रह्मपुरधाम पीठाधीश्वर विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत देव दुर्लभ कथा है ।यह कथा स्वर्ग में भी उपलब्ध नहीं है, केवल संसार वाले ही इस कथा का श्रवण करने का लाभ उठाते हैं। श्रीमद्भागवत नारायण हरि का वांगमयी स्वरूप है।श्रीमद् भागवत महापुराण के अंतर्गत 18000 श्लोक हैं, 335 अध्याय है और 12 स्कंध हैं।यह कथा मानव जीवन को ही नहीं बनती, बल्कि मृत्यु को भी सुधार देती है ।
श्रीमद् भागवत का प्रथम श्लोक परमात्मा नारायण के स्वरूप, स्वभाव, और प्रभाव का वर्णन करता है।
श्रीमद् भागवत की महात्म्य के संदर्भ में आचार्य जी ने धूंधाकारी और गोकर्ण संवाद का उल्लेख करते हुए कहां कि यह कथा प्रेत को भी मोक्ष प्रदान कर दिया ।इस संदर्भ में उन्होंने कहा की आत्मदेव आत्म स्वरूप है, उनकी पत्नी धुंधली बुद्धि है और धुंधकारी कुपुत्र है और गोकर्ण सुपुत्र है जिन्होंने भाई धुंधकारी को श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा सुनाकर मोक्ष प्रदान कराया।
यह कथा मानव जीवन को शांति , स्मृद्धि प्रदान करती है,। आचार्य जी ने कहा भक्ति ही एकमात्र सहारा है मोक्ष का।श्रीमद् भागवत कथा प्रत्येक दिन अपराह्न 3:00 बजे से प्रारंभ होगी और हरि इच्छा पर्यंत चलती रहेगी और इसकी पूर्णाहुति और भंडारा 21 फरवरी को आयोजित होगा। इस आयोजन में देश के संत,महंत ,विद्वान और साधक पधारने लगे हैं। १८फरवरी से श्रीरामचरित मानस का आवाह्न पाठ और २२फरवरी से शिवशक्ति महायज्ञ शुरू होगा। आयोजन को सफल बनाने में शिव मोहन तिवारी,सौरभ कुमार,अक्षय कुमार , सुदर्शन शर्मा,शिवविलास यादव,रामजी यादव, जयप्रकाश श्रीवास्तव ,जोखन दास, सुमन जी ,अथर्व कुमार आदि लगे है।
