
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)13 फ़रवरी।आदिकाल से चले आ रहे गुरु शिष्य के बीच अटूट विश्वास और गरिमा को विद्यार्थी अपनी सफलताओं के माध्यम से इस अटूट रिश्ते की बुनियाद को और मजबूती और गहराई प्रदान करते हैं। विद्यार्थियों को मिलती निरंतर सफलताएं यह साबित करती है कि विद्यार्थियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शैक्षणिक स्तर पर शिक्षा के साथ साथ शिक्षकों द्वारा दिए जाने वाले उचित मार्ग दर्शन एक पथ प्रदर्शक के रूप में अहम भूमिका निभाते है।उक्त बातों का संबोधन सिद्धार्थ फाउंडेशन स्कूल के प्राचार्य कमलेश ओझा ने उनके विद्यालय में अध्ययनरत आदित्य राज के जेईई मेंस में 99.27 पर्सेटाइल लाने पर आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान कही।
विदित हो कि आदित्य की इस सफलता पर स्थानीय हाउसिंग कॉलोनी न्यू पुलिस लाईन स्तिथ सिद्धार्थ फाउंडेशन की एक अन्य इकाई सिद्धार्थ इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में बुधवार को सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। जिसमें विद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षेतकर कर्मचारियों ने आदित्य राज की इस सफलता पर उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की।
लक्ष्य प्राप्ति के लिए इच्छा शक्ति जरूरी
सम्मान समारोह के दौरान विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के बीच आदित्य राज की सफलता पर हर्षित होते हुए प्राचार्य कमलेश ओझा ने सभी विद्यार्थियों को मार्गदर्शित करते हुए बताया की शैक्षणिक स्तर हो या जीवन के अन्य स्तर सभी स्तरों पर सकारात्मक लक्ष्य की प्राप्ति हेतु दृण इच्छा शक्ति की आवश्यकता है। यदि लक्ष्य के प्रति हमारी इच्छा शक्ति प्रबल है तो फिर किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति स्वतः आसान हो जाती है और हम लक्ष्य को प्राप्त कर लेते हैं। आदित्य राज की सफलता इस बात का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अंदर छुपी विधाओं को समझ उस लक्ष्य के प्राप्ति हेतु इच्छा शक्ति प्रबल करने का भी आह्वाहन किया।
विद्यालय के शैक्षणिक स्तर के प्रति जताया आभार
मूल रूप से जिले के धरमपुरा निवासी वर्तमान में स्थानीय उमा नगर चंदवा में परिजनों संग निवास करने वाले आदित्य राज ने जेईई मेंस में अपनी सफलता पर विद्यालय प्रबंधन और शैक्षणिक स्तर की सराहना करते हुए अपने आभार प्रकट किए। आदित्य ने कहा कि शैक्षणिक स्तर पर विद्यालय में दी जाने वाली बेहतर शिक्षा के साथ साथ साथ शिक्षकों द्वारा समय समय पर दिए जाने वाले मार्ग दर्शन ने मेरी इच्छा शक्ति को निरंतर मजबूती प्रदान कर मुझे आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।

सफलता में सहायक बने परिजन
अपनी सफलता में विद्यालय प्रबंधन के शैक्षणिक वातावरण एवं मार्गदर्शन की अहम भूमिका पर चर्चा करते हुए आदित्य ने बताया की उनके पिता योगेंद्र प्रसाद पेशे से कॉन्ट्रैक्टर है एवं मां सुनीता देवी गृहिणी है। आदित्य ने बताया की वे अपने अन्य दो भाइयों में सबसे छोटे है। शिक्षा के प्रति उनके माता पिता का निरंतर सभी भाइयों को मानसिक स्तर पर समर्थन मिलता रहा जिसके परिणाम स्वरूप इनके बड़े भाई भी इंजीनियरिंग कर नौकरी कर रहे है और एक भाई मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं।
शोध कार्यों में है रुचि
जेईई मेंस में 99.27 पर्सेटाइल लाने वाले आदित्य का सपना है कि वो अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हुए देश हित में शोध कर नई नई तकनीकों से देश के विकास को एक नई दिशा देंगे।

