RK TV News
खबरें
Breaking Newsसाहित्य

विध्वंसकारी है दुःख!

विध्वंसकारी है दुःख!

जन जन हैं यह जानते ,
मुखरित करता है मुख ।
आनंददाई खूब है होता ,
विध्वंसकारी है ये दुःख ।।
ईश वरदान यह सुख है ,
दुःख है ईश अभिशाप ।
या तो दुःख धैर्य परीक्षा ,
या है यह कर्मों के पाप ।।
मानव कर्म चारों निहित ,
धर्म अधर्म प्रेम व्यवहार ।
मार्ग जो आप अपनाइए ,
वही होता है जीवन सार ।।
वही होता है जीवन सार ,
वही होता कर्मों के फल ।
आज नहीं तो मिलेगा ही ,
निश्चित आनेवाला कल ।।
आवे ये विनाशकारी कल ,
बढ़ जाता है पेट का भूख ।
अन्न धन जन भी होते नाश ,
ढो लेता विनाशकारी दुःख ।।
रचनाकार:अरुण दिव्यांश ,डुमरी अड्डा ,छपरा ( सारण )बिहार।

Related posts

मानव अस्तित्व बचाये रखने के लिए वृक्षारोपण जरूरी : डीएम

rktvnews

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने नई दिल्ली स्थित एम्स के 68वें स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की।

rktvnews

नेता-चरित्रम्

rktvnews

जन सम्मान वीडियो कांटेस्ट- मनोरंजन के साथ योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने की राज्य सरकार की अनूठी पहल— रैम्या, रेखा और कमलेश ने जीती पुरस्कार राशि।

rktvnews

दैनिक पञ्चांग 29 जून : 24

rktvnews

भोजपुर:आइसा का जिला सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न।

rktvnews

Leave a Comment