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सम्मानो से बढ़ती है जिम्मेदारियां : दीप श्रेष्ठ

RKTV NEWS/अनिल सिंह ,23 जनवरी।फिल्म जगत में विडियो किंग के नाम से ख्याति प्राप्त फिल्म मेकर,निर्देशक एवं अभिनेता के रूप में अपनी अमूल छाप छोड़ने वाले दीप श्रेष्ठ ने भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान द्वारा दिसंबर माह में आयोजित तीन दिवसीय लोकोत्सव के दौरान दिए गए भोजपुरी क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान हेतु सम्मान के लिए संस्थान के प्रति अपना आभार प्रकट किया है।
विदित हो की दीप श्रेष्ठ उक्त आयोजित लोकोत्सव में सम्मान ग्रहण करने हेतु उपस्थित नहीं हो सके थे क्योंकि उस दौरान वे दिल्ली में आयोजित जेपी अवार्ड कार्यक्रम में बेस्ट फिल्म मेकर का अवार्ड ग्रहण करने हेतु शिरकत करने पहुंचे थे।
भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान द्वारा भिखारी ठाकुर लोकोत्सव 2024 में घोषित सम्मान को ग्रहण करने वो अपने व्यस्तम समय को निकाल आरा शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेंद्र सिंह के आवास पर उक्त सम्मान को ग्रहण किया और अपने आभार प्रकट किए।

औमान की राजधानी मसकट मे

देश विदेश में सैकड़ों सम्मान और अवार्ड पा चुके दीप श्रेष्ठ ने सम्मान पश्चात यहां पटना में अपना साक्षात्कार देते हुए बताया की जब भी कोई सम्मान मुझे प्राप्त होता है तब मेरी भोजपुरी सहित फिल्म जगत के प्रति सकारात्मक सोच को बल मिलता है साथ ही इसके वास्तविकता की गरिमा को बनाए रखने की जिम्मेवारी भी मेरी बढ़ जाती है।

निर्देशक शब्द की वास्तविकता को सदैव किया प्रदर्शित

निर्देशक की भूमिका को बारीक तरीके से निभाने वाले दीप श्रेष्ठ ने बताया की पर्दे पर चल रहे दृश्यों, पार्श्व संगीत और संबंधित दृश्यों की आंतरिक अनुभूति से दर्शकों को रूबरू कराना उतना आसान नहीं होता।यह एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी होती है जिसके साथ न्याय करना काफी कठिन होता है। उन्होंने कहा की एक निर्देशक की आंखे उन लाखों करोड़ो दर्शकों की आंखे होती है जो संबंधित विषय वस्तु के दृश्यों को उसके वास्तविक स्वरूप में देखने और उसकी आंतरिक अनुभूति करने को लालायित रहते है। दीप श्रेष्ठ के इस कथन की सत्यता उनके द्वारा निर्देशित किए गए फिल्मों और गानों के विडियो है।भारतीय संस्कृति के विरासत में भोजपुरी संस्कृति सभ्यता का बहुमूल्य योगदान है और भोजपुरी संस्कृति सभ्यता के विवाह के दृश्य…, हो या पारंपरिक त्योहारों छठ पूजा आदि के फिल्मांकन उन सबमें विवाह की रश्म,बेटी की बिदाई पर मां बाप के वियोग एवं छठ महापर्व पूजा आदि त्योहारों के पारंपरिक विधि विधान को काफी बारीकी से आत्मसात कराने की निर्देशन की कला के रूप में देखा जा सकता है।

अपने नाम “दीप श्रेष्ठ” को किया परिभाषित

दीप की तरह जल भोजपुरी फिल्म उद्योग को अपनी रौशनी से प्रकाश्यमान करते हुए कई बिहारी कलाकारों,टेक्नीशियन को फिल्म उद्योग में मौका दे उन्हे शिखर पर पहुंचाने का श्रेय भी दीप श्रेष्ठ को जाता है इसलिए यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी की इन्होंने अपने नाम” दीप श्रेष्ठ” को बखूबी परिभाषित किया है।

कलाओं को निखारा दिलाई पहचान

भोजपुरी संस्कृति और कला के क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों पर दीप श्रेष्ठ की हमेशा खोजी नजर रहती थी। उनके कला को प्रोत्साहित एवं नए कलाकारों को सहयोग कर उन्हे उनकी वास्तविक मंजिल तक पहुंचना ये उनकी सकारात्मक सोच का परिचायक है। इस संबंध में कहा जाता है की आज की चर्चित गायिका कल्पना को भी उनके वास्तविक शिखर तक ले जाने वाले दीप श्रेष्ठ ही है।
वर्ष 2001 में कल्पना द्वारा गाए गए विनय बिहारी लिखित गीतों के एल्बम “गवनवा ले जा राजा जी” में अपने कुशल अभिनय और बारीक निर्देशन का प्रदर्शन करते हुए इन्होंने भोजपुरी फिल्म उद्योग के तीसरे युग के शुरुआत का बिगुल फूंक इस उद्योग में जान डाल दी। कहा जाता है की इनके बारीक निर्देशन एवं कुशल अभिनय के कारण उक्त अल्बम ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और नए कलाकारों को उनकी मंजिल तक जाने का मार्ग प्रशस्त किया।

शारदा सिन्हा और अनुराधा पौडवाल तक का सफर…

35 साल से फिल्म उद्योग में अपनी काबिलियत का प्रदर्शन करने वाले दीप श्रेष्ठ ने 28 वर्ष पूर्व फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। दीप श्रेष्ठ ने बताया की इस फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आरा शहर और गीतकार विरेंद्र पांडेय का बहुत बड़ा योगदान रहा ।इस दौरान दीप श्रेष्ठ की मुश्किलें काफी बढ़ गई। उन्होंने बताया की काफ़ी लोगो द्वारा छल करने और पिता के देहांत की पीड़ा के साथ निरंतर प्रयासों के बाद मई 2001 में सेंसर बोर्ड से फिल्म “माई के दुलार ” पास हुई। उस दौरान पैसों की काफी किल्लत थी फिर टी सीरीज द्वारा” गवनवा लेजा राजा जी ” का निर्देशन और अभिनय करने का मौका मिला जो भोजपुरी फ़िल्म उद्योग की सबसे बड़ी सुपर डुपर हिट रही और भोजपुरी फिल्म उद्योग को एक नई दिशा दी।उसके बाद से सफलता का दौर चल पड़ा और लोग मुझे वीडियो किंग के नाम से जानने लगे।
कहा जाता है की इनके कुशल निर्देशन के कारण ही शारदा सिन्हा और अनुराधा पौडवाल द्वारा गाए छठ गीतों की विडियो शूटिंग के निर्देशन की जिम्मेवारी दीप श्रेष्ठ को ही दी जाने लगी।

बिहार की संस्कृति विरासत को लाया दुनिया के सामने

जहां लोग कमर्शियल फिल्म और सीरियल का निर्माण करते है वही दीप श्रेष्ठ ने अपने बिहार की संस्कृति और कला की सोच को दुनिया के पटल पर रखने का काम किया।भारतीय सिनेमा के मशहूर दादा साहेब फाल्के इण्डियन टेलीविजन अवॉर्ड 2022 और अखंड भारत गौरव अवार्ड को हासिल करने वाले दीप श्रेष्ठ जिनकी सफलता की गाथा इस कदर परवान चढ़ी की बीपीएससी की परीक्षाओं में इनको मिले दादा साहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवॉर्ड को लेकर प्रश्न भी आए।
दीप श्रेष्ठ ने बिहार की विरासत संस्कृति और कलाओं को गॉव गॉव घुम कर लोक गायकी को दूरदर्शन पर प्रसारित किए गए विरासत नाम के सीरियल में अपने उत्कृष्ट निर्देशन और एंकरिंग की कला के माध्यम से दुनिया के सामने लाया जो काफी चर्चा का विषय भी रहा।

सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद के साथ राज भवन में दीप श्रेष्ठ

लता दीदी के साथ काम करने का मलाल

अपने निर्देशन और अभिनय से कल्पना सरीखे कई कलाकारों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने में अमूल्य योगदान देने वाले दीप श्रेष्ठ जिन्होंने शारदा सिन्हा अनुराधा पौडवाल के छठ गीतों का वीडियो का निर्देशन आज से 24 साल पहले किया। वह जमाना सीडी -डीवीडी का था।अपनी सफलता के उतरोतर शिखर पर पहुंच दीप श्रेष्ठ ने देश ही नहीं वरन विदेशों में भी अपनी जगह बनाई। देश विदेश में मिले कई अवार्ड,सम्मान एवं अमेरिका में एक शॉर्ट फिल्म कंपटीशन में इनके अभिनीत शॉर्ट फिल्म” संदेह “का चयन होना इनकी सफलता का घोतक है।इतनी सफलताओं को अर्जित करने वाले दीप श्रेष्ठ को देश की स्वर कोकिला लता मंगेशकर के साथ काम नहीं कर पाने का मलाल है।

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