
RKTV NEWS/प्रो जे बी पांडेय,15 जनवरी।हमारे ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां मानी गई है जिसमें एक राशि है मकर।इस राशि में जब सूर्य प्रवेश करता है,तब मकर संक्रांति का पुनीत पर्व मनाया जाता है।
भौगोलिक दृष्टि से पृथ्वी दो गोलार्द्ध उतरी दक्षिणी गोलार्द्ध में विषवत् रेखा से विभाजित है।सूर्य जब दक्षिणी गोलार्द्ध से उतरी गोलार्द्ध के लिए प्रस्थान के क्रम में मकर रेखा पर स्थित होता है ,तो मकर संक्रांति का पुनीत पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति प्रत्येक वर्ष प्राय: 14 जनवरी को ही पड़ता है।इस पुनीत अवसर पर तिल और गुड़ बांटा और खाया जाता है।तिल स्नेह का और गुड़ मधुरता का प्रतीक है।इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होनी शुरू हो जाती हैं।मकर संक्रांति के गंगा स्नान शुभकर,संयमी ब्राह्मण को भोजन सामग्रियों से युक्त तीन पात्र,एक गाय का दान ,धनवान हों तो वस्त्र,आभूषण का दान, यदि निर्धन हों तो विप्रदेवता को फलदान करना चाहिए।दान करने के पश्चात् दही चूड़ा,गूड़ एवम् तिलयुक्त भोजन करना चाहिए और यथा शक्ति अन्य लोगों को भी भोजन कराना चाहिए।मकर संक्रांति पर काशी वास भी पुण्य दायक माना जाता है ।इस दिन त्रिवेणी संगम पर स्नान की अपनी ही महता है।ब्रह्म मुहूर्त में भक्त जन भीष्म पितामह की माता गंगा जी,यमराज की भगिनी यमुना जी और ब्रह्मा की संगिनी अंत:सलिला सरस्वती की जय जय कार करते हुए त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं।
यह पर्व बिहार,झारखंड, मध्यप्रदेश और उतरप्रदेश में खिचड़ी के नाम से प्रसिद्ध है।दक्षिण में यह पर्व पोंगल, पंजाब में लोहड़ी,असम में माघ बिहू के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र में नव विवाहिता स्त्रियां अपनी पहली संक्रांति को तिल का तेल, कपास और नमक का दान सौभाग्वती स्त्रियों को देती हैं।वे सौभाग्यवती स्त्रियां अपनी सखियों को हल्दी, रोली,तिल और गुड़ प्रदान करती हैं।

ऐसी चर्चा है कि सूर्य के उतरायण होने पर भगवान् राम ने पतंग उड़ाई थी।जो इन्द्र लोक में चली गई थी उसे इन्द्र पुत्र जयंत ने पकड़ ली।राम ने पतंग लाने के लिए हनुमान जी को इन्द्र लोक में भेजा।जयंत की पत्नी इस शर्त पर पतंग लौटाई कि भगवान् राम उनको दर्शन दें।हनुमानजी ने सब बात बताई।राम ने चित्र कूट में दर्शन देना स्वीकार किया, तब जयंत ने पतंग लौटाई।पतंग बाजी आपसी भाईचारे और प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक है।राष्ट्रीय पर्व मकर संक्रांति का पावन पर्व किसी धर्म,जाति,वर्ण ,वर्ग या
संप्रदाय का पर्व नहीं है।मकर संक्रांति भ्रातृ भावना का प्रतीक है।इस दिन पारस्परिक वैमनस्य को भूलकर लोग आपस में भाईचारे से मिलते हैं और भुवन भास्कर की भांति देश के सौभाग्य वृद्धि की कामना करते हैं।
