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भोजपुर:महेश्वर क्रांतिकारी सांस्कृतिक धारा की नींव के पत्थर : जितेंद्र कुमार

सांस्कृतिक आंदोलन को संगठित करने वाले आदर्श व्यक्तित्व : नीरज सिंह

जसम ने महेश्वर की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया।

RKTV NEWS/आरा(भोजपुर)25 दिसंबर।आज स्थानीय पकड़ी स्थित जनमित्र कार्यालय में जन संस्कृति मंच, भोजपुर द्वारा कवि, विचारक, संपाद‌क महेश्वर की जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत महेश्वर के चर्चित गीत सृष्टिबीज का नाश न हो, हर मौसम की तैयारी है’ के गायन से हुई, जिसे युवानीति के सूर्यप्रकाश ने गाया।
आलोचक सुधीर सुमन ने जनमत में प्रकाशित महेश्वर के आत्मसाक्षात्कार- ‘अतीत के खंडहर’, लेख- ‘एक आद‌मकद राष्ट्र की तलाश’; कविता – ‘ग्लैमर के ताजा संसार में’ तथा नामवर सिंह के श्रद्धांजलि लेख- ‘महेश्वर का निर्णय’ और नित्यानंद तिवारी के आलेख ‘मौत कोई शिकस्त नहीं होती’ का पाठ किया।
महेश्वर के योगदान की चर्चा करते हुए कथाकार सिद्धनाथ सागर ने कहा कि उनमें नई चीज़ों के सृजन की क्षमता थी। वे नए रचनाकारों को मंच देते थे। सबको संगठित करना उनकी खासियत थी। वे रचनाकारों को जनता से जुड़ने और लिखने के लिए प्रेरित करते थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष कथाकार नीरज सिंह और जितेंद्र कुमार (बिहार, राज्य अध्यक्ष, जन संस्कृति मंच) ने की। नीरज सिंह ने कहा कि एक बहुत बड़े सांस्कृतिक आंदोलन को संगठित करने के लिए वे आदर्श व्यक्तित्व थे। जसम के विस्तार में उनकी अहम भूमिका थी। जितेंद्र कुमार ने कहा कि महेश्वर क्रांतिकारी साहित्यिक- सांस्कृतिक धारा की नींव के पत्थर थे। महेश्वर बनने की प्रक्रिया को जानना जरूरी है। आज ऐसे व्यक्तित्व की बहुत जरूरत है।
शिक्षक हरिनाथ राम ने कहा कि महेश्वर ने जैसा जनपक्षीय लेखन किया, वैसा लेखन जनता से जुड़कर ही संभव है।
कवि सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि महेश्वर ने आदमी को निर्णायक होने की सीख दी। उन्होंने “हिरावल’ और ‘कोरस’ की स्थापना की थी। कवि सुनील कुमार “चौधरी ने प्रगतिशील-जनवादी लेखकों के वैचारिक पतन की आलोचना की तथा कहा कि आज महेश्वर की आत्मालोचना को याद करना ज़रूरी है। कवि सिद्धार्थ वल्लभ ने कहा कि पूर्ववर्ती लेखकों और समकालीन लेखकों से आपका कैसा संबंध है, इससे आपका चरित्र निर्मित होता है।
संचालन कवि सुमन कुमार सिंह ने भी महेश्वर की कुछ कविताओं का पाठ किया।
इस मौके पर विजय मेहता, विक्रांत, जितेंद्र विद्रोही, मधु कुमारी और कृष्णा कुमार भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर प्रख्यात तबला वादक जाकिर हुसैन और समांतर सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल की स्मृति में एक मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गयी।
भारत सरकार द्वारा प्रिंटेड रजिस्टर्ड बुक पोस्ट की सुविधा को समाप्त कर देने तथा केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा बाबा साहेब अंबेडकर पर अपमानजनक टिप्पणी करने तथा अवैज्ञानिक और अंधविश्वासपूर्ण धारणा व्यक्त करने की निंदा संबंधी प्रस्ताव भी लिया गया।

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