
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)04 दिसंबर।अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर,महाराजा हाता,आरा में सूबेदार स्वर्गीय रामवृक्ष सिंह की आठवीं पुण्यतिथि मनाई गई।इस अवसर पर राष्ट्र चेतना पर आधारित विचार मंथन एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।सभा की अध्यक्षता प्रोफेसर नंद जी दुबे ने की ।अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री नंद जी दुबे ने कहां की राष्ट्र के सच्चे पुजारी सैनिक होते हैं जिनका स्वार्थ सिर्फ राष्ट्र ही होता है।मुख्य अतिथि प्रोफेसर अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि कविताएं जनमन को अधिक प्रभावित करती हैं।कविताएं वह विधा है जिनमें मुर्दों में भी प्राण संचरित करने की शक्ति होती है। राष्ट्रीय चेतना वाली कविताएं अपेक्षाकृत अधिक दिनों तक जीवित रहती हैं! स्वर्गीय रामवृक्ष सिंह के पुत्र और साहित्य सम्मेलन चरपोखरी के अध्यक्ष कमल सिंह अमौरजा ने अपने पिताजी का संक्षिप्त जीवनवृत्त प्रस्तुत किया! उपस्थित मानसों ने रामवृक्ष सिंह के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
सभा में उपस्थित लोगों में रत्नेश ओझा राही,शिवदास सिंह ,अजय गुप्ता अज्ञानी,कुंवर सिंह,जनमेजय ओझा, शरद सिंह, तेज नारायण सिंह, कुमार अजय सिंह ,उदय प्रताप सिंह उर्फ तपन सिंह,रविंद्र शाहाबादी, कमल सिंह अमौरजा, रेनू मिश्रा, इंद्रमणि सिंह ,रमेश सिंह श्रीरामप्रपन्न, अयोध्या प्रसाद उपाध्याय,विनोद सिंह ईत्यादि थे।राष्ट्र चेतना पर आधारित विद्वानों के विचार एवं कवियों के काव्य पाठ देर शाम ०५ बजे तक दर्शकों को स्पंदित और आनंदित करते रहे। मंच का संचालन सुरेन्द्र सिंह ‘अंशु’ ने और धन्यवाद ज्ञापन रवीन्द्र शाहाबादी ने किया।
