जो भी लिखें, समाज की समस्याओं पर लिखें : महेश सक्सेना
RKTV NEWS/भोपाल( मध्यप्रदेश) 30 नवंबर।साहित्य समाज का आईना है, परंतु वह लेखक की सोच का भी आईना है। आज का समाज रचे गए साहित्य को उपयोगिता की कसौटी पर कसना जानता है। अत: साहित्यकार जो भी सृजन करें, जिम्मेदारी के साथ करें। उक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था का मुख्य आतिथ्य करते हुए कहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं बाल कल्याण शोध केंद्र के अध्यक्ष श्री महेश सक्सेना ने की एवं विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं अध्यक्ष कलामंदिर भोपाल डॉ गौरीशंकर शर्मा गौरीश एवं संस्था की उपाध्यक्ष एवं चर्चित कहानीकार डॉ अनीता चौहान भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सरस एवं सफल संचालन चर्चित उपन्यासकार श्री चंद्रभान राही ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना द्वारा चंदर ने किया। गोपाल देव नीरद ने पढ़ा, “कभी मंजिल तेरी आँखें, कभी मील लगे है।” गोकुल सोनी जी ने “एक पर एक फ्री” व्यंग्य कविता पढ़ी। डॉ शिवकुमार दीवान ने पढ़ा, “धुआं उड़ाती गाड़ियां, फैलाती हैं धुंध।” चंदर ने पढ़ा, ” बोल किसने कहा, तू ये टसुए बहा।” चंद्रभान राही ने पढ़ा, “क्या तेरे प्यार के अभी, हकदार हम नहीं।” डॉ विमल शर्मा ने पढ़ा, “अपने लिए भी जीने का मन करता है।” वी के श्रीवास्तव ने पढ़ा, जिंदगी के रास्ते में हैं, बहुत कठिनाइयां।” दिनेश भदौरिया ने पढ़ा, “देव पथ दर्शित करू, घिरने लगी है शाम।” अशोक व्यग्र ने पढ़ा, “रोग रण दारुण समय है।”
कुलदीप नारायण ने भी सदन को संबोधित किया। डॉ गौरीशंकर शर्मा गौरीश ने पढ़ा, “मैं समय हूं अपनी शैली में इतर।” अनिल शर्मा मयंक ने पढ़ा, “रगों में खून की जगह फौलाद बहता है।” अनिल कोचर ने पढ़ा, “धर्म हूं दीप जलाने आता हूं।” बिहारीलाल सोनी ने पढ़ा, हमने बहू को बेटी बनाके देखा।” दीपक पंडित ने पढ़ा, “जाने कितने परिंदों का ठिकाना है बरगद।” मनीष बादल ने सुंदर दोहे प्रस्तुत किए। डॉ गिरजेश सक्सेना ने पढ़ा,”सर की खेती हुई सफाचट, आंख भी धुंधली नई नई है।” सुदर्शन सोनी ने गद्य व्यंग्य “साहित्यकार के प्रकार” पढ़ा। प्रतिभा द्विवेदी ने “पिता सिंधु की गहनता, पिता उजाला भोर” पढ़ा। वीणा विद्या ने पढ़ा, “बात दिल की चली बात ही बात में।” विपिन बाजपेई ने भी सुंदर मुक्तछंद कविताएं प्रस्तुत की। कमलेश गुल ने पढ़ी, “बस एक बार मुझे, सरकार बनाने दो।”
अपने उद्बोधन में अध्यक्ष श्री महेश सक्सेना ने कहा कि साहित्य समाज से अलग नहीं हो सकता अत:साहित्यकार जो भी लिखें, समाज की समस्याओं पर लिखें।
अत में संस्था उपाध्यक्ष अनीता चौहान ने सभी का आभार व्यक्त किया।

