
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 अक्टूबर।शिव देवी हनुमतधाम कारीसाथ मे शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य व भव्य शुभारंभ हो गया। शुक्रवार को जीयरस्वामी के कृपा पात्र ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर ज.गु.रा.आचार्य डाँ. धर्मैन्द्र जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य का प्रतिपादन करते हुये कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान नारायण हरि का वांगमयी स्वरूप है।इसमें 12 स्कंध,335अध्याय और 18 हजार श्लोक है।श्रीमद्भागवत की कथा जीवन व्यवहार ही नहीं बनाती ,मृत्यु को भी पराजित कर देती है जीवन की सभी व्यथाओं को मिटा देती है।कथा मानव जीवनव्यवहार का सुन्दर संविधान है।इसमे भक्त और भगवान के विभिन्न अवतारों की कथाओं का दर्शन होता है। आचार्य जी ने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा न तो साधन से,न तो साधना से वरन गुरू गोविंद कृपा से मिलती है।श्रीमद्भागवत के महात्म्य का वर्णन करते हुए आचार्य जी ने नारायण हरि का स्वरूप, स्वभाव व प्रभाव का सहज,सरल ,सारगर्भित वर्णन किया। कथा श्रवण हेतु दूरदराज के गाँव से भक्त पुरुष महिलायें आ रही है और कथा श्रवण का भक्ति भाव से ग्रहण कर रही है। समिति की ओर से अच्छी व्यवस्था की गई हैं।व्यवस्था मे सुरेन्द्र सिंह व मेजर राणा सिंह तथा गाँव के तरूण सक्रिय भूमिका निभा रहे है।
