आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 दिसंबर।कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग भोजपुर द्वारा संयुक्त रूप से आज विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हेड डॉ प्रवीण कुमार द्विवेदी, सहायक निदेशक सस्य डॉ बृजेश कुमार सहायक निदेशक उद्यान दिवाकर भारती सहायक निदेशक मृदा रसायन अंशुल राधे सहायक निदेशक कृषि अभियंत्रण अभिमन्यु कुमार उप परियोजना निदेशक राणा राजीव रंजन सिंह सहायक अनुसंधान पदाधिकारी वीरेंद्र सिंह प्रखंड कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार गंगहर के मुखिया मुकेश कुमार, दौलतपुर के मुखिया देवेश कुमार, हसनपुर के सरपंच विमलेश सिंह के साथ संयुक्त रूप में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर द्विवेदी ने बताया कि खेतों मे कृषि अवशेष को जलाने से पर्यावरण के साथ भूमि का स्वास्थ्य एवं मानव स्वास्थ्य तीनों खतरे में है। खेत की मिट्टी के दशा और दिशा में सुधार हो और खेती का लागत मूल्य कम हो ,उर्वरकों की मांग घटे और पैदावार में वृद्धि हो और इसके लिए यह आवश्यक है कि हम हर दो से तीन सालों पर अपने मिट्टी की जांच अवश्य कराए।खेतों में लगातार जलाने की घटना के कारण तापक्रम में वृद्धि हो रही है। जिससे काफी कम वर्षा हुई।हमें अपने खेतों की मेड को मोटा और ऊंचा बनना है जिससे मिट्टी का संरक्षण हो और कृषि अवशेष को हर हालत में पुनर्चक्रण हो सके। ऐसा करने से कई गुना पैदावार बढ़ती है और आर्थिक लाभ मिलेगा।
अंशुल राधे जी बताया की यहां निशुल्क मिट्टी जांच 12 मानकों पर किया जाता है।
और मिट्टी लेने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से मई के बीच का होता है।
डॉ ब्रजेश ने लोगों को सलाह दिया कि आप मिट्टी जांच के आधार पर अपने फसल को लगाएंगे तो उत्पादन में वृद्धि के साथ ही धीरे-धीरे आपके खेतों की मिट्टी में भी उर्वरा शक्ति की वृद्धि होगी।
अभिमन्यु कुमार ने जानकारी दी कि आज के समय में खेतों में कृषि अवशेष के प्रबंधन के लिए लगभग 23 प्रकार के कृषि यंत्र राज्य सरकार ने अनुदान पर उपलब्ध हैं आवश्यकता है उनके उपयोग करने की।
सहायक निदेशक उद्यान भारती जी ने बताया कि सब्जियों की खेती के लिए जैविक पदार्थ का होना आवश्यक है ।
राणा राजीव रंजन ने कहा कि हम सभी एक खतरनाक संकट से गुजर रहे हैं वह है जल संकट अगर इसी तरह से हम पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करेंगे तो आने वाले समय में खेती छोड़िए हमें पीने के लिए पानी के लिए भी सोचना पड़ेगा
प्रखंड कृषि पदाधिकारी मनोज चौधरी ने विस्तार से मिट्टी नमूना संग्रह की जानकारी दी उन्होंने बताया कि अधिकांश फैसले 15 सेंटीमीटर की गहराई तक से भोजन ग्रहण करती है।एक एकड़ के खेत से कम से कम कर से पांच जगह से नमूने का संग्रह इस गहराई से करना चाहिए इसके लिए हम खुरपी कुदाल या आवगर मशीन का प्रयोग कर सकते हैं ।
आवश्यकता है कि अब से भी हम अपने में सुधार करें और अपने भूमि के मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए सजग होकर के उसका संरक्षण करें । इस अवसर पर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी उपलब्ध कराया गया एवं उसके बारे में विस्तार सेअनुसंधान पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार ने अंत में कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन दिया।

