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बिहार सरस मेला:प्राचीन संस्कृतियों का पुनर्मिलन, विलुप्त हो रही कलाकृतियों को मिल रहा प्रोत्साहन।

घर की चहारदीवारी में कैद कला का बड़े कैनवास पर प्रदर्शन।

हस्त निर्मित कसीदाकारी देशी उत्पादों की बढ़ रही मांग।

खरीदारों से पटा रहा मेला परिसर।

जीविका ने पुश्तैनी परंपरा और शिल्प से जोड़ महिलाओं को दिलाई उनकी पहचान।

अररिया की प्रमिला ने सुनाई सफलता की कहानी, बिक गए सारे उत्पाद।

शनिवार को 38 लाख पार रहा महिला उद्यमियों का व्यापार,करोड़ पार का अनुमान।

शिल्प से निर्मित बटन की बढ़ी डिमांड।

जीविका दीदियों ने स्वाद को बनाया रंगीन,चखाया देशी स्वाद।

बांस से निर्मित उत्पादों के प्रति बढ़ रहा आकर्षण।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)22 सितंबर। रविवार का दिन बिहार सरस मेला के लिए खास रहा,ग्रामीण शिल्प की खरीददारी और देशी व्यंजनों का लुत्फ़ उठाने 50 हजार से अधिक लोग आये।बिहार सरस मेला 18 सितंबर से बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति , जीविका द्वारा ज्ञान भवन, पटना में आयोजित है l
प्राचीन संस्कृतियों का पुनर्मिलन, विलुप्त हो रही कलाकृतियों को प्रोत्साहन एवं कल तक घर की चाहरदीवारी में कैद हुनर का बड़े कैनवास पर प्रदर्शन एवं बिक्री बिहार सरस मेला में हो रही है।एक तरफ ग्रामीण शिल्प एवं कलाकृतियों को प्रोत्साहन और बाज़ार तो दूसरी तरफ ग्रामीण हुनर को मेला के माध्यम से सम्मान दिया जा रहा है।स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाओं के हुनर, आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन के विविध रंगों को का समावेशन भी सरस मेला में प्रदर्शित है।लोक शिल्प एवं परंपरा पर आधारित सरस मेला अपने अन्दर लोक संस्कृति, परंपरा एवं लोक कला को समेटे हुए राष्ट्रीय स्तर पर परिलक्षित है और आगंतुकों को लुभा रहा है।
विदेशी और मशीनरी व्यवस्था से इतर हाथ से निर्मित और कसीदाकारी किये हुए देशी उत्पाद एवं दादी-नानी के ज़माने के व्यंजन आगंतुकों के लिए आकर्षण के खास केंद्र हैं। सीप से बने शर्ट-पैंट, सूट आदि के बटन, माला, कान बाली, हाथ की बाला, पावजेब और शंख इत्यादि लोगों को बरबस ही रिझा रहे हैं।वहीँ घास , बालू , लकड़ी के बुरादा आदि से बनी कलाकृतियाँ, लहठी, चूड़ियां, खादी के परिधान , कास्यं, पीतल, पत्थर,घास एवं जुट आदि से बनी कलाकृतियाँ, दरी-कालीन, चादर , रसोई घर के सामान और बचपने के खिलौने, बांस एवं जुट से बने उत्पाद, सिक्की कला, मधुबनी पेंटिंग, फुलकारी कला, बुटिक प्रिंट की साड़िया , अहीर कला, तंजोर कला, कच्छ कला, सिक्की कला, बम्बू कला, लेदर पपेत्री, कलमकारी, अदिवा, हैडलूम समेत हैंडीक्राफ्ट के अंतर्गत आनेवाली विभिन्न कलावों के तहत निर्मित उत्पादों की जमकर खरीद-बिक्री हो रही है।
स्टॉल पर उपस्थित ग्रामीण शिल्पकार स्वयं सहायता समूह से जुडी हुई हैं l समूह से जुड़कर उन्होंने अपने हुनर और पुश्तैनी परंपरा और शिल्प को व्यवसाय से जोड़ा है।समूह से मिली सहायता, ऋण , प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की बदौलत ग्रामीण महिलाएं अब कुशल शिल्पकार एवं व्यवसाई के तौर पर आज सरस मेला में खुद के द्वारा अपने हाथ से निर्मित उत्पादों को लेकर देश के कोना-कोना से मेला में आई हैं। प्रमिला देवी पहली बार सरस मेला में आई हैं ।प्रमिला देवी अररिया से बेंत से बने डलिया और टोकरी को लेकर आई हैं l चार दिन में उन्होंने लगभग 20 हजार की बिक्री की है l गाँव में रहकर इतनी राशि कमाना मुश्किल था l प्रमिला देवी बताती हैं कि उन्होंने काफी गरीबी देखी है। पति पतानु मांझी और वो खेत में मजदूरी करते थे,लेकिन अब उनकी गरीबी दूर हो गई है।प्रमिला देवी भारती जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी। प्रमिला पहले से ही बेंत से डलिया , टोकरी , स्टूल, फर्नीचर आदि बनाना जानती थी।उन्होंने इसी हुनर को जीविका के माध्यम से व्यवसाय में तब्दील किया।समूह से क्रमशः 10, हजार, 20 हजार और 30 हजार रूपया ऋण लिया और बेंत व्यवसाय शुरू किया।अपने बेटा भोला मांझी को सिलीगुड़ी में इसके लिए प्रशिक्षण भी दिलाया l प्रशिक्षण के बाद उनके बेटा ने उनके हुनर को आधुनिक बाज़ार से जोड़ा l घर से ही बेंत से निर्मित उत्पादों का व्यवसाय शुरू हुआ। घर से ही कारोबारी बेंत से निर्मित उत्पाद उनसे थोक में ले जाते हैं।लेकिन उसमे ज्यादा मुनाफा नहीं होता है जबकि सरस मेला में आकर उन्हें ज्यादा मुनाफा हुआ है।लाये गए सभी उत्पाद बिक गए हैं। प्रमिला बताती हैं कि सरस मेला में आकर उन्हें व्यवसाय के नए तरीके भी सीखने को मिला है l
मेला के चौथे दिन 21 सितंबर को 38 लाख 61 हजार से अधिक की राशी के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई l खरीद-बिक्री का आंकड़ा स्टॉल धारकों द्वारा लिए गए रिपोर्ट के आधार पर आधारित होता है l रविवार को खरीद-बिक्री का आंकड़ा 1 करोड़ पार करने की संभावना है l
शनिवार को अनुमानत: 40 हजार से अधिक लोग आये और खरीददारी की सरस मेला 27 सितंबर तक चलेगा।
बिहार सरस मेला का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित,प्रवेश निःशुल्क है।

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