
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)12 सितंबर। बुधवार को भूदान आन्दोलन के जनक,स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही, महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी संत विनोबा की 130,वीं जन्म जयन्ती महोत्सव स्थानीय गांधीनगर में डाँ. सत्यनारायण उपाध्याय, अध्यक्ष भोजपुर जिला आचार्य कुल की अध्यक्षता में आयोजित हुई।आगत अतिथियों का स्वागत आचार्य कुल के प्रधान सचिव प.मधेश्वर पान्डेय ने किया।
वीरकुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य धर्मेन्द्र ने विनोबा जयन्ती महोत्सव का उद्घाटन करते हुए कहा कि संत विनोबा का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट़ के गागोदा मे हुआ ।प्राथमिक शिक्षा गाँव मे हुई ।उच्च शिक्षा के लिए बम्बई जाना था पर वे वाराणसी आ गये ।वाराणसी मे बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटन में महात्मा गांधी भाषण से काफी प्रभावित हुए।गांधी जी के आश्रम गये ,गांधी के होकर रह गये। सेवा के साथ साथ अध्ययन भी चलता रहा।देश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही हुए,कई बार जेल गये।स्वतंत्रता के पश्चात भूदान ,ग्रामदान,संपत्ति दान, श्रमदान आदि आन्दोलन चलाया।भूदान मे 44एकड़ भूमि प्राप्त हुई जिसमे अकेले बिहार ने 22,लाख एकड दान दिया ।जिसका उपयोग भूमि हिनता मिटाने मे हुआ। विनोबा जी शोषण मुक्त, सेवा प्रधान अहिंसक समाज रचना के पक्षधर थे।इस अवसर पर डाँ. ए.के.तिवारी, डाँ. ज्योतिन्द्र कुमार, डा.अजीत कुमार, डाँ. रमेश उपाध्याय, विनय प्रसाद, राजेश्वर राय, विवेकानंद ओझा, विकास यादव आदि ने भी विनोबा जी को 21वीं सदी का महान संत बतलाया।अध्यक्षीय भाषण मे डाँ. उपाध्याय ने कहा कि विनोबा जी संत के साथ समाजसेवी, विद्वन और क्रान्तिकारी विचारक थे।धन्यवाद ज्ञापन मधेश्वर पान्डे ने की।
