
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 अगस्त। बुधवार को बक्शी कुलदीप नारायण कल्चरल सोसाईटी द्वारा आयोजित 111वां श्री कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह की तृतीय निशा पर आयोजित कार्यक्रम पर भारतीय संगीत की परंपरा हजारों वर्ष प्राचीन है । इस परंपरा के संस्थापक स्वयं नटराज भगवान् शंकर हैं जिनके डमरू से निकली नाद ने संगीत का रूप धारण किया । इस परंपरा को विस्तृत करने वाले नटवर श्री कृष्ण ने तो कालिया के फन पर भी नृत्य से सृष्टि को आनंदित किया है। संगीत वो अमृत है जिसके रसपान से परम सुख की अनुभूति होती है । उक्त बाते कवियित्री डॉ. किरण कुमारी ने उद्घाटन करते हुए कही । अवसर था स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में चर्चित शास्त्रीय गायक उस्ताद निजामुद्दीन खां ने राग पुरिया धनाश्री में विलंबित ख्याल के साथ द्रुत ख्याल ” पयलिया झनकार मोरी झनन झनन बाजे झनकार” व ठुमरी बातों बातों में बीत गयी रात ” प्रस्तुत कर दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया । वरिष्ठ तबला वादक राणा प्रताप सिन्हा ने स्वतंत्र तबला वादन में अजराड़ा घराने की खास बंदिशों को सुनाकर समां बाँधा। कथक नृत्यांगना हर्षिता विक्रम ने कथक नृत्य के प्रारंभ में श्री राम की वंदना, तीनताल में शुद्ध कथक व मीरा की कृष्ण भक्ति पर आधारित भाव प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। हरमोनियम पर श्रेया पांडेय व तबले पर सूरज कांत पांडेय ने संगत से रंग भरा । मंच संचालन रोहित कुमार व धन्यवाद ज्ञापन गुरु बक्शी विकास ने किया ।
