भोजपाल साहित्य परिषद की काव्य~गोष्ठी संपन्न।
RKTV NEWS/भोपाल (मध्यप्रदेश)11 नवंबर।रायपुर (छत्तीसगढ़) से पधारे साहित्यकार, पत्रकार, यू ट्यूबर सुनील कुमार जायसवाल के भोपाल आगमन पर उनके सम्मान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन भोजपाल साहित्य परिषद के अध्यक्ष प्रियदर्शी खैरा जी के आवास पर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता खैरा जी ने की। मुख्य अतिथि सुनील कुमार जायसवाल एवं सारस्वत अतिथि सुरेश पटवा रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ करते हुए वरिष्ठ साहित्यिक दीपक पंडित ने पढ़ा, “खोटे सिक्के चल गए बाजार में, यह खबर भी छापिये अखबार में”। कैलाश मेश्राम ने गीत “रहो साथ तुम उम्र भर” सुनाकर वातावरण में सरसता घोल दी। कवि बिहारीलाल सोनी की रचना “यादों के दीप जलाए तो रखिए, निगाहों में अपनी बसाए तो रखिए” को भी सराहा गया। मनोज गुप्त मनोज की कविता “मैं कौन हूं” पर खूब तालियां बजीं। वी के श्रीवास्तव की व्यंग्य क्षणिकाओं, “समंदर के बीच प्यास से पानी की तड़प” पर लोग वाह वाह करने लगे। सुदर्शन सोनी जी के व्यंग्य “डिजिटलाइजेशन और बड़े बाबू” ने खूब गुदगुदाया। सुरेश पटवा जी की रचना “पढ़ सको तो दिल की भी, इक ज़ुबान होती है।” ने भी खूब तालियां बटोरी। डा विमल कुमार शर्मा की कविता “कहना चाहा कुछ, ये मैं क्या कह गया।” बहुत प्रभावशाली रही।
संचालन कर रहे गोकुल सोनी ने छंद “कभी पुष्प गंध हुई, कभी राग रंग हुई, कभी कभी अंतहीन जंग हुई जिंदगी।” के साथ ही गीत “रेत पर नाम लिखकर मिटाते हो क्यों, मन में मूरत बसी है क्या मिट पाएगी” पढ़कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। मुख्य अतिथि सुनील जायसवाल ने भी गहन संवेदना जागृत करती रचनाएं पढ़ीं। अध्यक्षता कर रहे प्रियदर्शी खैरा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि साहित्य सदैव जोड़ने की बात करता है तोड़ने की नहीं। इस दृष्टि से जायसवाल जी के साहित्यकारों से तादात्म्य स्थापित करने के प्रयास अनुकरणीय हैं। उन्होंने “थक गए पांव, थके नहीं हम” पढ़कर श्रम की प्रतिष्ठा स्थापित की।
अंत में मनोज गुप्त मनोज ने सभी का आभार व्यक्त किया।

