
आरा/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 19 अगस्त। भाई-बहनों के अटूट रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन का त्योहार परम्परागत रूप से हर्षोल्लास के साथ खुशी-खुशी संपन्न हो गया। इस अवसर पर बहनों ने भाई के कलाई पर राखी बांधी। भाई के ललाट पर टीका लगाकर और दीप दिखा कर बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी तथा ईश्वर से भाई के लंबी उम्र की कामना की। कई बहनों ने मंदिरों में पूजा पाठ कर भाई को राखी बांधा और उनके लंबे उम्र के लिए मन्नत मांगी। भद्रा रहने के कारण बहनों ने दोपहर बाद भाइयों की कलाई पर राखी बांधा। राखी बांधने का मुहूर्त दोपहर 1:30 बजे से था। पंडितों के अनुसार रविवार की रात्रि 2:21 बजे से भद्रा चढा जो सोमवार के दोपहर 1:25 बजे तक रहा। धार्मिक मान्यता है कि यदि भद्रा का साया हो तो राखी नहीं बांधना चाहिए। साथ ही कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार भद्रा को क्रूर और आसुरी प्रवृत्ति माना गया है।
ऐसी भी मान्यता है कि संध्या काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। ज्योतिषियों के अनुसार राखी का सीधा संबंध सूर्य और मंगल से है। विशेष परिस्थितियाॅ अपवाद के रूप में होती हैं। इसीलिए इस वर्ष दोपहर 1:25 के बाद राखी बांधने का मुहूर्त बना। दोपहर बाद राखी बांधने का सिलसिला शुरू हुआ। इस अवसर पर स्निग्धा शुभम्, अश्वनी विश्वास, नेहा कुमारी, माया देवी, मीरा, नीतू, रूपम, खुशबू, अन्नू, अंशु ने भाइयों के कलाई पर राखी बांधा और मिठाई खिलाया। भाइयों ने भी बहनों को उपहार दिया।
