पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 25 मई। इस लोक सभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं है जो गंभीर चिंता पैदा करने वाली है। उक्त विचार राजद के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री जी और उनकी पार्टी के नेताओं ने आचार संहिता की धज्जियाॅ उड़ाई हैं, उस पर चुनाव आयोग की चुप्पी चिंता का कारण है। अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं होगा तो उसके तत्वावधान में होने वाले चुनाव पर लोगों को भरोसा कैसे हो सकता है। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव की एक और परंपरा को तोड़ा है। जिस दिन मतदान होता है, उसका प्रारंभिक आंकङा उसी दिन चुनाव समाप्ति के बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी कर दिया जाता है। उसके अगले दिन चुनाव आयोग अपना अंतिम आंकड़ा जारी करता है। लेकिन इस बार पहले चरण का वोट डाले जाने के 11 दिन बाद अंतिम आंकड़ा चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया। चुनाव आयोग ने दूसरे चरण का अंतिम आंकङा चार दिन बाद जारी किया। 13 मई को हुए चौथे चरण का अंतिम आंकङा भी चार दिन बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया। उन्होंने कहा कि हर चरण के मतदान के प्रारंभिक आंकड़े और अंतिम आंकड़े में अच्छा खासा अंतर है और चार चरणों के चुनाव के प्रारंभिक आंकड़े और अंतिम आंकड़े के बीच कुल 1.07 करोङ वोटों का अंतर बताया जा रहा है। यह गम्भीर चिंता का विषय है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट इसकी सुनवाई कर रहा है। कुल मिलाकर देखा जाय तो चुनाव आयोग गंभीर संदेह के घेरे में आ चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं का जैसा दुरुपयोग किया गया है, इससे इनकी विश्वसनीयता संकट में है।
