आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)24 मई।भोजपुर जिले के गैर सरकारी संगठन दिशा एक प्रयास ने बाल विवाह मुक्त जिला और राज्य बनाने के संकल्प पर लगातार कार्यक्रम चला रहा है। 2030 तक बाल विवाह मुक्त भोजपुर बन सके इसके लिए नया रोड मैप बन चुका है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान से जुड़े 22 राज्यों के 200 सहयोगी संगठन नई दिल्ली में कार्यशाला में हिस्सा लिया और 2024-25 के लिए रोड मैप पर विस्तार से चर्चा की। बाल विवाह के खात्मे के लिए असाधारण एकता और दृढ़ निश्चय के साथ काम चल रहा है।
कार्यशाला में मिले विचारों और मार्गदर्शन से उत्साहित भोजपुर जिले में काम कर रहे दिशा एक प्रयास आश्वस्त है कि वह जिले को और अंतत: राज्य को 2030 बाल विवाह मुक्त बनाएगा।
दिशा एक प्रयास की निदेशक कुमारी सुनीता सिंह ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 2022 में हुई जिसे अपनी पहुंच, प्रभाव और सहयोगियों के नेटवर्क में उल्लेखनीय विस्तार किया है। पिछले वर्ष तक 161 सहयोगी संगठन देश के 17 राज्यों के 300 जिलों में काम कर रहे थे जबकि अब यह अभियान 22 राज्यों तक पहुंच चुका है।यद्यपि अभियान का मुख्य फोकस बाल विवाह पर है लेकिन बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल यौन शोषण जैसे बच्चों के सुरक्षा व संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी काम कर रहा है। इस कार्यशाला में हमने इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए नए और लक्ष्य केंद्रित तरीके सीखे। इन्होंने बताया की हम अपने जिले में पंचायतों, जिला परिषदों और पंचों-सरपंचों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।जमीनी स्तर पर जन जागरूकता अभियानों और कानूनी हस्तक्षेपों के माध्यम से बतायेंगे की बाल विवाह अपराध है और गैरकानूनी काम के नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।तय किया गया कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में कानूनी दखल सबसे प्रभावी औजार है। जिला प्रशासन और बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) के साथ समन्वय से बाल विवाह के खिलाफ बने कानूनों पर अमल सुनिश्चित करना और जनजागरूकता अभियान चलाना, लोगों को बाल विवाह नहीं करने के लिए समझाना-बुझाना और कानूनी उपायों की मदद से बाल विवाह की रोकथाम करना है।
अभियान के संयोजक रवि कांत ने कहा, “बाल विवाद जैसी समाज में गहरे जड़े जमाए बैठी सामाजिक बुराई के खात्मे के लिए इस तरह के बड़े पैमाने पर साझा रणनीतिक प्रयास अहम हैं। अगर इस चुनौती से निपटना है तो एक साझा और सोची-समझी रणनीति पर अमल जरूरी है।बाल विवाह की कुरीति सदियों से जारी है लेकिन अब समय आ गया है जब इसे उखाड़ फेंका जाए।जागरूकता के साथ-साथ पंचायती राज प्रावधानों के अंतर्गत सहयोग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का मार्गदर्शन में भोजपुर बाल विवाह मुक्त अभियान को 2030 तक सफल बनाने में कामयाब होंगे।
