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शिव के स्मरण मात्र से होता है कष्टों का निवारण।

महाशिवरात्रि पर विशेष-1

आरा/भोजपुर(ज्योतिषाचार्य संतोष पाठक)द्वारा रोचक तथ्य

*देवों के देव महादेव अनादि और अनंत है। प्रत्येक देवी-देवताओं की जन्म कथाएं प्रचलित है, किंतु महादेव अजन्मे है। अर्थात वो इस सृष्टि की रचना से पहले से है, और जब यह सृष्टि समाप्त हो जाएगी, तब भी केवल महादेव ही होंगे।*

ऊँ नमः शिवाय”

*कहते है, पृथ्वी की सम्पूर्ण शक्ति इसी पंचाक्षर मंत्र में ही समाहित है। त्रिदेवों में ब्रह्म देव सृष्टि के रचयिता है, तो श्री हरि पालनहार हैं, भगवान भोलेनाथ संहारक। शिव तो आशुतोष हैं, जल्द ही प्रसन्न हो जाते है।*

*शिव-शक्ति*

*शिव के साथ जब तक शक्ति है तभी तक वो शिव कहलाते है, बिना शक्ति के शव के समान हो जाते है। उनका अर्धनारीश्वर रुप इसी बात का प्रतीक है। अपने इस रुप से प्रभु सबको ये सीख देना चाहते है, कि प्रकृति (स्त्री) और पुरुष दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे होते हैं और साथ मिलकर ही सम्पूर्ण होते है। किसी की भी महत्ता कम नहीं है अपितु समान है।*

*उनका निवास*

महादेव अपने परिवार, पार्वती, श्रीगणेश और कार्तिकेय के साथ कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। साथ ही नंदी, शिवगण आदि भी उनके साथ वहां पर निवास करते हैं।*

*शिव के भक्त शैव*

*भगवान शिव के कई नाम हैं और वो योग और नृत्य सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं के देवता हैं। हिंदू धर्म में जो लोग उनका अनुसरण करते हैं उन्हें शैव कहा जाता है। एवं उनके सम्प्रदाय को शैव सम्प्रदाय कहते हैं।*

*शिव के अनंत अनुपम स्वरुप*

*शिव को दुनिया के विध्वंसक के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनकी कई अन्य भूमिकाएँ भी हैं। हिंदू धर्म के अनुसार शिव के अनंत रुप हैं; जैसे वो निर्माता है तो विध्वंसक भी, आंदोलन हैं तो शांति भी, वो प्रकाश है, तो अंधेरा भी, और आदमी भी वही और औरत भी वही हैं। इन भूमिकाओं में विरोधाभास होता है लेकिन शिव की ये भूमिकाएँ यह दिखाने के लिए हैं कि ये चीजें जितना दिखाई देती हैं, उससे कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़ी हैं।*

शिव महा कल्याण कारी है। वो तो केवल एक लोटे जल से ही खुश हो जाते हैं। शिव आदिदेव है। शिव के स्मरण मात्र से ही सब दुख दूर हो जाते है। वो तो भोले नाथ है, जो भक्त उन्हे डंडे से मारता है, उससे भी खुश हो जाते है। जहां वो एक ओर महायोगी है, वहीं दूसरी तरफ माता पार्वती से प्रेम विवाह भी किया है। जब भी किसी जोड़े को आशीर्वाद दिया जाता है, तो उन्हें शिव-पार्वती की उपमा से ही सुशोभित किया जाता है।*

*शिव जीवन और मृत्यु, विनाश और पुनर्जन्म के देवता हैं, (वह सब जो परस्पर विपरीत है, वह एक कैसे है? यही शिव का रहस्य है।) उनके 1008 अलग-अलग नामों के साथ, यह उनके अविवेकी रहस्यों के आधार का प्रतिनिधित्व करता है। हिंदू धर्म में सबसे बड़े देवता के रूप में, शिव को उनके दिव्य परिवार, उनकी असाधारण शक्तियों, उनके रूप और उनके लाखों भक्तों के लिए जाना जाता है।*

*महाशिवरात्रि*

इसे महाशिवरात्रि का पर्व भी कहते हैं। यह पर्व हिन्दुओं का मुख्य त्यौहार है। इस दिन भक्त-जन व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं। कुछ लोग पूरे दिन व्रत करते हैं, जबकि कुछ आधा दिन तक व्रत करते हैं और बाबा को जल चढ़ाने के बाद भोजन या फलाहार आदि कर लेते हैं। इसी दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। सभी बारह शिवरात्रियों में इसका विशेष स्थान है, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि कहते है। हिन्दी कैलेण्डर की बात करे तो यह फाल्गुन मास की चतुर्दशी को पड़ता है।*

*शिव का प्रिय मास – सावन*

*माता सती ने शिव को प्रत्येक जन्म में वरने का प्रण लिया था। किंतु सती के पिता दक्ष के अपने पति का अनादर किए जाने पर स्वयं को भस्म कर लेना, भगवान शिव से सहन न हुआ। और वो इस दुनिया से विरक्त हो गये। पुनः सती ने पार्वती के रुप में पर्वत-राज हिमालय और मैना देवी के घर में जन्म लिया। कहते है, इस जन्म में भी वो बचपन से ही शिव को चाहती थी। पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर से कठोर तप और व्रत किए। तीज का कठोर व्रत भी माता पार्वती ने ही शुरु किया था। सावन में ही शिव को पार्वती के रुप में उनकी पत्नी पुनः मिली थी। इसलिए शिव को यह माह बहुत प्रिय है।*

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