
बसंत मोरे अंगना !
स्वागत में खड़ा है ,बसंत मोरे अंगनां l
मिथिला में आये हैं,राम- लखन पहुनां ll
साँवर- गोर बादल,न सीतल बदरिया,
मंद मुस्कान- सुरभित हर्षित बयरिया l
पीअर सरसों सुहागन शिवान पहिनि गहना,
स्वागत में खड़ा है,बसंत मोरे अंगनां l
मिथिला में आये हैं, राम – लखन पहुनां ll1ll
धानी – हरियर चूनर ओढ़े जानकी दुलारी,
देवलोक से भी सुंदर धरती मइया न्यारी l
विजुरी चमके गगन तक, करेंट मारे कंगना,
स्वागत में खड़ा है,बसंत मोरे अंगनां l
मिथिला में आये हैं,राम – लखन पहुनां ll2ll
ताल ,तलैया,सरिता,तरुवर – सरोवर ,
आये बसंत दादुर – कोयल गावैं सोहर l
अमराई से पपिहा – मैना झांकें सुगना,
स्वागत में खड़ा है,बसंत मोरे अंगनां l
मिथिला में आये हैं, राम – लखन पहुनां ll3ll
मधुकर “नरेश” मधुर – मधुर गुन गुनावैं,
सुख- दु:ख के रंग सब के जीवन में आवै
निर्झर झरना सा बनना है संत मोरे सजना,
स्वागत में खड़ा है,बसंत मोरे अंगनां l
मिथिला में आये हैं,राम – लखन पहुनां ll4l

