
ग़ज़ल लिख दूँ!
बेमिसाल सुन्दरता का,
क्या नाम लिख दूँ।
ग़ज़ल लिख दूँ,
या कोई कविता लिख दूँ ,
कजरारी नैनो को झील लिख दूँ।
या केह दूँ, बादल से सिमट तूँ,
कोई जुल्फे लहराने वाली हैं।
या केह दूँ मौसम से,
अंगड़ाई ले तूँ,
बसंत आने वाला है।
गदराई बदन चंचल चितवन,
दामिनी सी दमकती चंद्रहार,
आभा बिखेरती कर्णकुण्डल।
बाहों पर निखरती चुड़ियाँ,
लगती कोई चीतचोर,
लिपटी दिलकश सारी में ऐसी,
लगता चाँद से लिपटा चकोर।
सुर्ख गुलाबी होठो पर सजी,
मंद-मंद मुस्कान,
कशिश बढ़ाती पंखुड़ियों को,
बिल्कुल तराशा हुआ बदन।
कोई निश्छल मुर्ति सी।
बरबस नज़र को खिचती,
पोर-पोर से झड़ते सुन्दरता।
परियो की कहानी सी।
बस पाकीजा मुर्ति हो तुम,
क्या नाम दूँ कुदरत की,
अद्भुत करिश्मे को।
ठहरी-ठहरी नजर,
ख्यालो में उतरते शब्द।
लगता शब्दो का विराम नहीं,
कोई हसीन सपनो सा,
भूले विसरे कोई कहानी लिख दूँ।
ग़ज़ल लिख दूँ,
या फिर कोई कविता लिख दूँ।
बता अद्भुत सुन्दरता का,
क्या नाम लिख दूँ।
क्या नाम———–।
