जिला कलेक्टर ने मॉडल तालाब, डिग्गी, खाले, सार्वजनिक जोहड़ इत्यादि के प्रस्ताव के लिए दिए निर्देश।
हनुमानगढ़/राजस्थान 29 फरवरी। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान को लेकर जिला कलक्टर काना राम की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को कार्ययोजना के लिए बैठक आयोजित हुई। जिला कलक्टर ने बताया कि वर्ष 2024-25 में बजट घोषणा के अंतर्गत मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.0 शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत आगामी वर्ष में जिले के 97 गांवों में वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए जायेंगे। उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य पक्के एनीकट, एमआईटी, डब्ल्यूएचएस एवं एमएसटी का निर्माण कराना है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि एवं बंजर हो गई भूमि को उपजाऊ बनाया जाकर कृषकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके। इससे गांवों में पेयजल की स्थिति सुदृढ़ होगी।
जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को कहा कि यथासंभव मॉडल तालाब, खाले, डिग्गी तथा सार्वजनिक उपयोग के लिए जोहड़े बनाए जाने पर ध्यान दें। इसके अतिरिक्त व्यक्ति विशेष की बजाय सार्वजनिक उपयोग वाले पेयजल सरंक्षण माध्यमों को प्रस्तावित करें। उन्होंने कहा कि बिना मनरेगा के कन्वर्सेशन के एमजेएस में कोई भी कार्य स्वीकृत नहीं किया जाए। किसी भी गांव को बाढ़ से बचाया जा सकता है तो जिला इनोवेशन में इसे ले, क्योंकि इससे अच्छा इनोवेशन कोई नहीं हो सकता। भादरा विधायक की मांग पर जिन गांवों में बरसात के पानी भरने की शिकायत रहती है, उन गांवो के चिह्निकरण कर बीडीओ को वैकल्पिक रास्ता ढूंढने के निर्देश दिए।
भादरा विधायक संजीव बेनीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का आभार जिन्होंने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना को 2.0 से फिर से शुरू किया है। जिससे गांव में पेयजल की समस्या के निस्तारण के साथ-साथ जलसंचय भी होगा। उन्होंने कहा कि इसके चार चरणों में लगभग 20 हजार गांवों में 5 लाख वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे। इसके लिए ग्राम, ब्लाक, जिला व राज्य स्तर पर समितियां बनाई गई है। 2023-24 के लिए 5 हजार गांवों का चयन किया गया है, जिनके कार्य पूर्ण की अवधि आगामी 2 वर्ष रहेगी।
जिला कलेक्टर ने बताया कि अभियान का उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संसाधनों का कन्वर्जेन्स कर परम्परागत पेयजल, जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करना, नवीन जल स्त्रोतों का निर्माण, जल एवं मृदा संरक्षण के कार्य व वर्षा जल संग्रहण संरचनाओं की गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन, गावों में पेयजल की कमी को दूर करने हेतु पीने का पानी गांवों के नजदीक उपलब्ध करवाने का प्रयास करना, भू-जल स्तर में वृद्धि करना एवं गिरते भू-जल के स्तर को रोकना, वर्षा जल संग्रहण एवं संरक्षण कर सिंचित एवं कृषि योग्य क्षेत्रफल को बढ़ाना, जल एवं मृदा संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना, सघन वृक्षारोपण कर राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना है।
उन्होंने बताया कि जिला स्तरीय समिति के कार्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रबोधन एवं समीक्षा करना, जल संरक्षण एवं जल संग्रहण कार्यों हेतु कॉर्पोरेट जगत एवं गैर सरकारी संस्थाओं के संसाधनों के उपयोग हेतु व्यवस्था करना, विभिन्न केन्द्र एवं राज्य वित्त पोषित योजनाओं की प्रचलित मार्गदर्शिकाओं के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर चयनित क्षेत्रों में राशि का अभिसरण सुनिश्चित करना है। विभागीय अनुभव एवं तकनीकी दक्षता के आधार पर यथा संभव कार्य संबंधित विभाग से ही सम्पादित करवाना, जिला कार्य योजना में से योजना के लिए उपलब्ध राशि से कार्य स्वीकृत कर सम्पादित करवाना, जिला जल संचय कार्य योजना तैयार कर राज्य स्तर पर नोडल विभाग को प्रस्तुत करना एवं राज्य स्तरीय नोडल विभाग द्वारा कार्यों की वेटिंग उपरांत जिला जल संचय कार्य योजना का अनुमोदन करना है।
बैठक में जिला परिषद सीईओ सुनीता चौधरी, भादरा विधायक संजीव बैनीवाल, पीलीबंगा विधायक विनोद गोठवाल, कृषि संयुक्त निदेशक डॉ. रमेश चंद्र बराला, सिंचाई विभाग के एसई शिव चरण रैगर सहित अन्य मौजूद रहे।

जिला कलेक्टर ने मॉडल तालाब, डिग्गी, खाले, सार्वजनिक जोहड़ इत्यादि के प्रस्ताव के लिए दिए निर्देश।