
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 27 फरवरी।गौरीशंकर विवाह महोत्सव के अन्तर्गत श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के द्वितीय दिनआचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने भगवान के 24अवतारों की कथा सुनाई। इन्होंने कहा की अनाचार, अत्याचार,पापाचार, धर्म की हानि आदि।पर मुख्य हेतु भक्तों पर भगवान कृपा की वृष्टि करना ही है।आचार्य जीने कहा राक्षसों ,अन्यायियों,अत्याचारियों को तो अपने संकल्प से मार सकते,मगर सेवरी का बैर खाना,विदुर जी का साग खाना, भक्तों के घर जा जाकर दर्शन आदि के लिए निराकार ब्रह्म नराकार रुप में अवतरित होते है।
आचार्य जी ने कहा श्रीकृष्णा के अवतार का दातात्रेय चरित्र को कहते हुए अनुसूया माता के पातिव्रत्य धर्म फर भी कारूणिक व्याख्यान देते हुए विदुर जी के धराधाम पर आने और विभांडक ऋषि का भी चरित्र चित्रण करते हुए क्रियामाण, हसंचित व प्रारब्ध कर्म कि व्यावहारिक अर्थ किया। कथा सुनते हुए भक्त विह्वल हो जाते ,कथामृत का पान करते अघाते नहीं।। श्रीमद्भागवत का पाठ परायण काशी से पधारे मुक्तेश्वर शास्त्री कर रहे हैं जबकि पूजन पं त्रिगुण जी महाराज कर रहे है।
