
सरस्वती वंदना..!
हे!माँ सरस्वती वर दो
वाणी में मधुरिम स्वर दो,
ऊर पावनता से भर दो।
मेरी निज जड़ता दूर करो,
हे!माँ सरस्वती वर दो।।
न रहे क्लेश विषाद कभी,
मिट जाएँ तम उपहास सभी।
तुम ज्ञान के साज बजा दो,
हे!माँ सरस्वती वर दो।।
मेरे काव्य कुञ्ज मेंआओ माँ,
रस की धार बहाओ माँ।
मेरे शब्द-शब्द जगा दो,
हे!माँ सरस्वती वर दो।।
तुम ऋषि मुनी की वाणी हो,
वेदों की महिमा कहलाती हो,
जन-जन को सुन्दर मन दो,
हे! माँ सरस्वती वर दो।।
हे! ओजस्विनी वागीश्वरी,
हे! श्वेताम्बरी परमेश्वरी।
तुम दिव्य ज्योति कण कण दो,
हे!माँ सरस्वती वर दो।।
साभार शब्दों की “सरिता मंच”


