
ऐ जिंदगी..!
आहिस्ता आहिस्ता चल ऐ जिंदगी,
अभी सफर बहुत ही लंबी है,
कुछ कर्ज अभी बाकी है,
फर्ज भी अधुरी है,
हरेक को पूरी करना जरूरी है ।
अभी अभी तो आया हूँ इस धरा पर,
कुछ पल तो ठहरने दो,
धरा पर रहने की मजा लेने दो,
रिश्ते परिवार,दोस्तों के संग बिताने दो,
लेकिन तुम तो इतने जल्दी मे हो कि?
कुछ मानते ही नही हो,ऐ जिंदगी ।
आहिस्ता आहिस्ता चल सफर अभी लंबी है।
माना कि चुन्नू कवि को यहाँ नही ठहरना है बहुत दिनों तक,
लेकिन मिली है जब ये जिंदगी तो?
कुछ पल सुकून का बिताने दो न?
अपने पराये,,पराये अपने को भेद जानने दो न?
पल में कैसे लोग बदल जाते हैं, उसे जानने दो न?
दुख सुख मे सुख दुख मे फर्ज को जानने दो न?
यही सब जानने को तो डहरना चाहता हूँ ऐ जिंदगी,
आहिस्ता आहिस्ता तुम चलो ना?
बस:::कुछ और पल तु ठहर जा ऐ जिंदगी
कुछ मुलाकातें किसी से है मेरी अधुरी,
वादा कर रखा हूं उससे कि,
अंतिम वक्त मे तुझसे सारे गिले शिकवे दुर करना है ।
कम से कम,
उसके खातिर ऐ जिंदगी कुछ आहिस्ता आहिस्ता तु सफर कर,,,,,,,,सफर कर,,,सफर कर।


