पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 5 फरवरी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीसीई-एनआईटी पटना परिसर स्थित एम्फीथियेटर में शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एल्यूमिनाई मीट-2024 का दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने बीसीई-एनआईटी पटना के डायमंड जुबली बैच वर्ष 1964 के पूर्ववर्ती छात्रों, गोल्डेन जुबली बैच वर्ष 1974 के पूर्ववर्ती छात्रों, रूबी जुबली बैच वर्ष 1983-84 के पूर्ववर्ती छात्रों एवं एडमिन बैच एलुमिनाई फाॅर सिल्वर जुबली वर्ष 1994 के छात्रों को प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। बिहार कॉलेज आफ इंजीनियरिंग- नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, पटना एलुमिनाई सोसाइटी द्वारा आयोजित इस एलुमिनाई मीट में मुख्यमंत्री ने सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो संतोष कुमार द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर तैयार की गई स्मारिका का भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विमोचन किया। एलुमिनाई सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो संतोष कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पौधा एवं अंग वस्त्र दे भेंट कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने एनआईटी पटना 1954 बैच के छात्र और रिटायर्ड चीफ इंजीनियर जेवी साह तथा एनआईटी पटना 1959 बैच के छात्र एवं रिटायर्ड चीफ इंजीनियर केडीपी सिन्हा को शाॅल एवं पौधा भेंट कर अभिनंदन किया।
शताब्दी समारोह मे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज आफ इंजीनियरिंग-एनआईटी, पटना एलुमिनाई सोसाइटी के इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का अभिनंदन करते हुए कहा कि हर वर्ष फरवरी के पहले रविवार को यहाॅ एलुमिनी मीट का आयोजन होता है जिसमें कई बार मुझे शामिल होने का मौका मिला है। प्रति वर्ष 30 जनवरी को महात्मा गांधी के शहादत के अवसर पर गांधी घाट पर मैं बापू को श्रद्धा सुमन अर्पित करने आता हूॅ जहाँ हमारे एनआईटी पटना के साथी पहुँच कर हमें एलुमिनाई मीट में शामिल होने की याद दिलाते हैं। मुझे इस संस्थान से पास आउट हुए 51 साल हो गया है। यहां हर वर्ष आयोजित होने वाले एलुमिनाई मीट में हमारे पुराने एवं नये साथी भी आते हैं जहाँ हमें अपने सहपाठियों से मिलने का मौका मिलता है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज से 100 साल पहले वर्ष 1924 में बिहार कॉलेज आफ इंजीनियरिंग स्थापित हुआ। इसके स्थापना के 100 साल पूरे हो गए हैं। बीसीई-एनआईटी, पटना एलुमिनाई सोसाइटी के आग्रह पर हमने इस प्रांगण में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है जिस पर आने वाला कुल व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। इसके लिए एक सप्ताह के अंदर रकम आवंटित कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि अटल जी की सरकार में मैं मंत्री था, उस समय देश में कुल 14 जगहों पर एनआईटी बन रहा था। मेरे इस आग्रह पर कि बिहार कॉलेज आफ इंजीनियरिंग, पटना देश का छठा इंजीनियरिंग कॉलेज है, वर्ष 2004 में बिहार कॉलेज आफ इंजीनियरिंग को एनआईटी का दर्जा मिला। हम लोगों के समय यहाॅ छात्रों की संख्या 500 थी जो अब बढ़कर 5000 हो गई है। एनआईटी पटना को विस्तारित करने के लिए बिहटा में 125 एकड़ जमीन उपलब्ध कराया गया है जो अब बन कर तैयार हो गया है। बिहटा मे भी करीब 6000 छात्रों की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। एनआईटी पटना के अलावा देश में कहीं भी इतनी बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों की व्यवस्था नहीं है। हम लोगों ने बिहार के प्रत्येक जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना कराई है और वहाँ लड़कियों के एडमिशन के लिए 35 प्रतिशत सीट भी आरक्षित कर दी है। यह परिसर एनआईटी पटना के पहले हिस्से के रूप में जाना जाएगा जबकि बिहटा में 125 एकड़ में स्थापित परिसर दूसरा हिस्सा होगा।
कार्यक्रम को बीसीई-एनआईटी पटना के निदेशक पीके जैन, बीसीई-एनआईटी पटना एलुमिनी सोसाइटी के सचिव डा संजय कुमार, बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के चेयरमैन प्रो जीके चौधरी, बीसीई-एनआईटी पटना एलुमिनाई सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो संजय कुमार, कोषाध्यक्ष प्रो संजीव कुमार एवं प्रो सीएन सिन्हा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, प्रो कामिनी सिन्हा, प्रो अमृता सिन्हा, इंजीनियर राशिद परवेज, इंजीनियर निलेश कुमार, प्रो रमेश कुमार, प्रो सुलेना रजक, प्रो शैलेंद्र मंडल, प्रो सुरेंद्र प्रसाद, इंजीनियर आरती सिन्हा, बीसीई-एनआईटी पटना एलुमिनाई सोसाइटी के सदस्य गण, अध्यापक गण, छात्र-छात्राएँ, पूर्ववर्ती छात्र एवं उनके परिजन उपस्थित थे।

