
शमां जलने के बाद..!
बफा-वफा होता नहीं कुछ,
याद आता नहीं कुछ,
गुजर जाने के बाद।
साहिल हो या प्रेम हो,
बिखर जाता सब,
भँवर आने के बाद।
पूजे जाते तुर्बत,
आश फायदो के बाद।
लकीरें उगती नहीं पत्थर पर,
दिखती है जमीन पर,
नमी आने के बाद।
वो तो भ्रम है कि प्यार है कहीं,
बात समझ आती जेब खाली होने बाद।
नहीं है चाहत परवाह क्या,
मिट जाती निशानियाँ,
मय्यत जाने के बाद।
वो दर्द, वो दरिया छुपा के रख,
लूट जाते है सब,
जाहिर कमजोरी के बाद।
देखी है कितनी,
सफिना निकली है भँवर से।
डूब जाती है कितनी,
भँवर थमने के बाद।
जाया ना कर आँसू,
फौलाद बनने दें उसे।
झूक जाता है आसमान,
मौसम बदलने के बाद।
वो कोई दर्द नहीं,
सबेरा होत तलक थमें नहीं।
रौशनी दिखती है अक्सर,
अब्र हट जाने के बाद।
खिलेंगे फूल इक दिन,
मौसम भी गुलाबी होगा।
रुक ज़रा नजारा देखना,
बसंत आने के बाद।
यूँ रुक, हँस दें जरा, हँसता रह,
पतंगे कितने जल जाते है,
शमा जलने के बाद।
आस्मां भी झूकते है,
मौसम बदलने के बाद।


